बदहाली . मामूली बीमारी का भी नहीं होता इलाज, कर दिया जाता है रेफर
30 बेड, 8 चिकित्सक की जगह मात्र छह बेड व एक प्रतिनियोजित समेत तीन चिकित्सक
अस्पताल में परमानेंट ड्रेसर, फाॅर्मासिस्ट व लैब टेक्नीशियन नहीं
सरैयाहाट : प्रखंड मुख्यालय में अवस्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाओं का घोर अभाव है. तीन वर्ष पूर्व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को उत्क्रमित कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा दिया गया था, पर आज भी सुविधा पीएचसी के अनुरूप ही है. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए 30 बेड, 8 चिकित्सक चाहिए. पर अभी भी छह बेड ही उपलब्ध है. तीन चिकित्सक हैं. जिसमें एक चिकित्सक डॉ ओम प्रकाश प्रतिनियोजित है.
इस अस्पताल में परमानेंट ड्रेसर, फाॅर्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन नहीं है. यह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुमका जिले से 60 किलोमीटर दूरी पर बिहार बॉर्डर पर अवस्थित है. जबकि यहां से 40 किलोमीटर दूर देवघर व 45 किलोमीटर दूर गोड्डा जिला है. जब भी इस इलाके में कोई सड़क हादसा होता है, तो मरीज को केवल मरहम पट्टी ही हो पाती है, इलाज नहीं. प्राय: मरीजों को यहां से रेफर कर दिया जाता है. वहीं मरीजों की संख्या ज्यादा होने पर फर्श पर इलाज करना पड़ता है.
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र.
एंबुलेंस है पर चालक नहीं
इस स्वास्थ्य केंद्र में कुछ दिन पूर्व सरकारी एंबुलेंस आया हुआ है पर चालक की वजह से शोभा की वस्तु बन कर रह गयी है. इमरजेंसी की स्थिति में भी इस वाहन का उपयोग नहीं हो पाता है. मंगलवार को जब एक दंपति को यहां लाया गया, तो उनके शव को गांव तक पहुंचाने के लिए परिजनों ने एंबुलेंस की व्यवस्था करा देने की गुहार लगायी थी, लेकिन एंबुलेंस नहीं मिल पाया था. अक्सर जख्मी मरीज को भी यहां से जब देवघर रेफर किया जाता है, तब परिजनों को निजी स्तर से ही वाहन रिजर्व करना पड़ता है.
न जांच की सुविधा न एक्स रे : यहां कोई विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है. कई ऐसी गंभीर बीमारी रहने पर जांच की सुविधा तक यहां उपलब्ध नहीं है. इतना ही नहीं एक्स रे मशीन तक नहीं है. आखिर इसे उत्क्रमित करने का फायदा स्थानीय लोगों को क्या मिला है इसे बताने वाला कोई नहीं है.
बोले पदाधिकारी
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन का निर्माण कार्य चल रहा है. अभी सीएचसी में सुविधाओं का अभाव है. स्टाफ की घोर कमी है. एंबुलेंस आया है, पर चालक के अभाव में खड़ा है. स्वास्थ्य केंद्र में जरूरत के अनुरूप संसाधन नहीं है.
– एके दास, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी
ऐसे अस्पताल का कोई मतलब बताये : ग्रामीण
इस अस्पताल को पीएचसी से अपग्रेड कर सीएचसी में तब्दील कर दिया गया है, पर सुविधा नगण्य है. जिसका खामियाजा सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को झेलना पड़ता है. जान पर बन आती है.
– सुरेन्द्र यादव, ग्रामीण
यहां पर्याप्त मात्रा में न चिकित्सक है न ही कोई सुविधा. छह बेड है. ज्यादा मरीज एक साथ आ जाते हैं तो उसे जमीन पर ही इलाज कराना पड़ता है. नजदीक में कोई अस्पताल भी नहीं है.
– महबूब अंसारी, ग्रामीण
प्रधान ने कहा
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुविधा नहीं रहने से प्राय: मरीजों को रेफर कर दिया जाता है, जिससे यहां के लोगों को काफी परेशानी होती है.
– चिरंजीवी महामरिक, ग्राम प्रधान
