धनबाद. एसएनएमएमसीएच में बेड की कमी को लेकर बुधवार को ‘प्रभात खबर’ में प्रकाशित खबर के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया. उप विकास आयुक्त सन्नी राज एसएनएमएमसीएच पहुंचे और मरीजों की भर्ती व्यवस्था का जायजा लिया. इस दौरान उन्होंने अस्पताल परिसर स्थित कैथलैब बिल्डिंग का विशेष निरीक्षण किया.
निरीक्षण में सामने आया कि दो तल वाली कैथलैब बिल्डिंग में फिलहाल सिर्फ एक तल का इस्तेमाल मरीजों की भर्ती के लिए हो रहा है. दूसरा तल लंबे समय से बंद है. डीडीसी ने अस्पताल अधीक्षक डॉ डीके गिंदौरिया से दूसरे तल का इस्तेमाल नहीं होने का कारण पूछा.
अधीक्षक ने बताया कि दूसरे तल की वायरिंग कमजोर है. इसके अलावा बिल्डिंग में लगी लिफ्ट भी खराब है. इस पर डीडीसी ने संबंधित अधिकारियों को दोनों समस्याओं का जल्द समाधान करने और दूसरे तल का मरीजों की भर्ती के लिए इस्तेमाल शुरू करने का निर्देश दिया.
डीएमएफटी फंड से होगी लिफ्ट की मरम्मत
अस्पताल में बढ़ती बेड की जरूरत को देखते हुए डीडीसी ने कैथलैब बिल्डिंग की बंद व्यवस्था को जल्द दुरुस्त करने पर जोर दिया. उन्होंने डीएमएफटी फंड से लिफ्ट की मरम्मत कराने का निर्देश दिया. साथ ही बिल्डिंग की वायरिंग का ऑडिट कराने को कहा, ताकि इसकी सुरक्षा और क्षमता की जांच कर आवश्यक मरम्मत करायी जा सके.
डीडीसी ने कहा कि भवन उपलब्ध होने के बावजूद यदि उसका पूरा इस्तेमाल नहीं हो रहा है, तो इसे प्राथमिकता के आधार पर ठीक कराया जाना चाहिए.
आने वाले दिनों में नहीं होगी बेड की कमी
डीडीसी ने कहा कि आने वाले समय में एसएनएमएमसीएच में बेड की कमी नहीं होने दी जायेगी. उन्होंने कैथलैब की पूरी बिल्डिंग को दोबारा मरीजों के उपयोग में लाने की बात कही. प्रशासन की कोशिश है कि अस्पताल में उपलब्ध आधारभूत संरचना का अधिकतम इस्तेमाल कर भर्ती क्षमता बढ़ायी जाये, ताकि मरीजों को बेड के लिए इंतजार नहीं करना पड़े.
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एक तल पर 44 बेड, दूसरा तल शुरू होने से बढ़ेगी क्षमता
कैथलैब बिल्डिंग के एक तल पर 44 बेड की व्यवस्था है. दूसरे तल को चालू किये जाने से अस्पताल को अतिरिक्त बेड उपलब्ध होंगे. इससे इमरजेंसी और मेडिसिन विभाग में मरीजों की बढ़ती संख्या के बीच भर्ती को लेकर होने वाली परेशानी कम हो सकती है.
गौरतलब है कि मंगलवार को एसएनएमएमसीएच में मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण इमरजेंसी से लेकर मेडिसिन विभाग तक सभी 337 बेड फुल हो गये थे. बेड नहीं मिलने से कई मरीजों के परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ा था और अस्पताल परिसर में हंगामे की स्थिति भी बनी थी.
