पीएम पोषण योजना की राशि की निकासी और व्यय प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है. वित्तीय वर्ष 2026-27 से योजना की राशि एसएनए स्पर्श प्रणाली और भारतीय रिजर्व बैंक के ई-कुबेर प्लेटफॉर्म के माध्यम से निकाली और खर्च की जाएगी. इस संबंध में झारखंड राज्य मध्याह्न भोजन प्राधिकरण के निदेशक समीर एसएम ने सभी उपायुक्त-सह-अध्यक्ष जिला स्तरीय स्टीयरिंग-सह-मॉनिटरिंग कमेटी और जिला शिक्षा पदाधिकारियों (डीईओ) को निर्देश जारी किया है.
हर स्तर पर तय होगी जिम्मेदारी
नई व्यवस्था में राशि के संचालन के लिए विभिन्न स्तरों पर मेकर, चेकर और डीडीओ नामित किए गए हैं. राज्य स्तर पर लेखापाल-सह-लिपिक को मेकर, ओएसडी को चेकर और निदेशक, मध्याह्न भोजन प्राधिकरण को डीडीओ बनाया गया है.
जिला स्तर पर जिला कंप्यूटर ऑपरेटर मेकर, डीएसई कार्यालय के लिपिक या लेखा लिपिक चेकर और डीएसई को डीडीओ की जिम्मेदारी दी गई है. वहीं विद्यालय एवं प्रखंड स्तर पर संबंधित प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी (बीईईओ) को मेकर बनाया गया है.
मदर सेंसेशन के बाद शुरू होगी प्रक्रिया
मदर सेंसेशन मिलने के बाद राज्य स्तर पर स्वीकृत्यादेश और आवंटन को ई-कुबेर पर अपलोड किया जाएगा। इसके बाद जिला स्तर पर आवंटन का सत्यापन किया जाएगा और व्यय का विपत्र तैयार होगा। चेकर द्वारा जांच के बाद डिजिटल हस्ताक्षर से विपत्र डीडीओ को भेजा जाएगा। डीडीओ की ओर से इसे ई-कुबेर पर अग्रसारित किया जाएगा।
डीडीओ कोड नहीं तो निकटतम प्रखंड से जुड़ेंगे
जिन स्थानों पर डीडीओ कोड उपलब्ध नहीं है, वहां सभी डीएसई को आईएफएमएस पर मैपिंग कराने, संबंधित यूजर आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराने और खर्च की पूरी जवाबदेही सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है. नए शैक्षणिक प्रखंडों में यदि बीईईओ का पद या डीडीओ कोड नहीं है, तो उन्हें निकटतम प्रखंड से संबद्ध किया जाएगा.
नई व्यवस्था का उद्देश्य पीएम पोषण योजना की राशि के इस्तेमाल में पारदर्शिता, डिजिटल निगरानी और वित्तीय जवाबदेही को मजबूत करना है.
