धनबाद. धान की खरीद-बिक्री में बिचौलियों की भूमिका पर अंकुश लगाने और किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ दिलाने के लिए सरकार ने इस बार प्रक्रिया में बदलाव किया है. खरीफ विपणन मौसम 2026-27 में सरकारी केंद्रों पर धान बेचने वाले किसानों के लिए ई-केवाईसी और जमीन का सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है.
खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के अनुसार अब तक 1,59,226 किसानों को 2,84,740 एसएमएस भेजे जा चुके हैं. सत्यापन के बाद वास्तविक किसानों से ही सरकारी केंद्रों पर धान खरीद की जायेगी.
पिछले सत्र में लक्ष्य के 12 प्रतिशत ही हुई थी खरीद
धनबाद में पिछले धान खरीद सत्र के दौरान 16 पैक्स खरीद केंद्र बनाये गये थे. जिले के लिए दो लाख क्विंटल धान खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया था. जनवरी 2025 तक जिले में 7,267 किसान पंजीकृत थे, जबकि करीब 21,477 क्विंटल धान की खरीद हो सकी थी. यह निर्धारित लक्ष्य का लगभग 12 प्रतिशत था.
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इससे पहले दिसंबर 2024 तक जिले में महज 6,654.93 क्विंटल धान की खरीद हुई थी, जो लक्ष्य का 3.33 प्रतिशत थी. कम खरीद को देखते हुए इस बार प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही किसानों के दस्तावेज और जमीन संबंधी रिकॉर्ड दुरुस्त कराने पर जोर दिया जा रहा है.
खरीद शुरू होने से पहले सत्यापन पर जोर
सरकार ने इस बार धान खरीद शुरू होने से पहले किसानों की पहचान और जमीन से जुड़े रिकॉर्ड का सत्यापन कराने की व्यवस्था की है. किसान का ई-केवाईसी और भूमि सत्यापन अंचल कार्यालय के माध्यम से पूरा होने के बाद ही सरकारी खरीद व्यवस्था में धान बेचने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.
विभाग का उद्देश्य खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और सरकारी केंद्रों पर वास्तविक किसानों की उपज की खरीद सुनिश्चित करना है. सत्यापन पहले पूरा होने से खरीद के दौरान तकनीकी और दस्तावेजी अड़चन कम होने की उम्मीद है.
15 नवंबर तक पूरा कराना होगा सत्यापन
धान बेचने के इच्छुक किसानों को 15 नवंबर 2026 से पहले ई-केवाईसी और भूमि सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करानी होगी. इसके लिए किसान अपने नजदीकी लैम्पस या पैक्स, प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी अथवा जिला आपूर्ति पदाधिकारी से संपर्क कर सकते हैं.
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पिछले सत्र में धनबाद में धान खरीद के लिए 16 केंद्र संचालित किये गये थे. इस बार खरीद शुरू होने से पहले सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कराने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि किसानों को सरकारी केंद्रों पर धान बेचने में परेशानी न हो और खरीद व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे.
