रांची, (मनोज सिंह): नगर निकाय चुनाव में सियासी गर्मी परवान पर है. इस क्रम में हवा पर भी दावे-प्रतिदावे किये जा रहे हैं. रांची, धनबाद और जमशेदपुर में क्लीन एयर यानी साफ हवा देने के वायदे किये जा रहे हैं. ऐसे में इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर भी लोगों का ध्यान है. जानकारी के अनुसार, राज्य की राजधानी रांची में हवा थोड़ी सुधरी है. लेकिन धनबाद को अभी भी ब्लैक सिटी का दर्जा प्राप्त है और जमशेदपुर में संकट बढ़ चला है.
नेशनल एयर क्वालिटी कंट्रोल प्रोग्राम में शामिल 3 नगर निगम
इधर केंद्र सरकार ने राज्य के तीन जिलों के नगर निगमों को नेशनल एयर क्वालिटी कंट्रोल प्रोग्राम में रखा है. इसका उद्देश्य इन जिलों के शहरी निकायों में होने वाले प्रदूषण को रोकना है. इस सिलसिले में केंद्र ने तीनों जिलों को 2018 के बाद करीब 279.44 करोड़ रुपये दिये. इसमें 90 करोड़ रुपये खर्च नहीं हो पाये. इस दौरान कुछ शहरों का प्रदूषण स्तर तो गिरा, लेकिन कुछ का बढ़ गया. बताते चलें कि प्रदूषण (पीएम-10) का सामान्य मानक स्तर 60 माइक्रो ग्राम प्रति क्यूबिक मीटर है.
प्रदूषण से मुक्ति को बनाया मुद्दा
वर्तमान चुनाव में जनप्रतिनिधियों ने फिर से शहर को प्रदूषण से मुक्ति दिलाने का वायदा किया है. करीब-करीब सभी प्रमुख प्रत्याशियों के एजेंडे में शहर, वार्ड और निकाय को प्रदूषण मुक्त करना है. राजधानी के प्रत्याशी शहर को धूल-कण मुक्त बनाने का वादा कर रहे हैं. धनबाद के प्रत्याशियों के मुद्दे में कोयले की कालिख को कम करना है. जमशेदपुर के प्रत्याशी शहरी और औद्योगिकीकरण से होने वाले प्रदूषण को कम करने की बात कह रहे हैं.
जमशेदपुर को मिली सबसे अधिक राशि, सबसे कम खर्च
नेशनल क्लीन एयर कंट्रोल प्रोग्राम (एनएसीपी) के तहत 2018 से अब तक सबसे अधिक राशि जमशेदपुर को मिली है. धनबाद को जितनी राशि भारत सरकार के इस कार्यक्रम के तहत मिली है, उससे अधिक खर्च कर दी गयी है. रांची को 2018 से अब तक करीब 93.5 करोड़ रुपये मिले हैं. इसमें राजधानी के नगर निगम ने वायु की गुणवत्ता सुधार पर 62.9 करोड़ रुपये खर्च कर दिये हैं. धनबाद को 69.09 करोड़ रुपये अब तक इस प्रोग्राम से मिले हैं. वहीं, धनबाद ने 75.93 करोड़ रुपये खर्च किये हैं.
सबसे अधिक प्रदूषण धनबाद में
केंद्र द्वारा एनएसीपी द्वारा चयनित चार जिलों में से सबसे अधिक प्रदूषण धनबाद में है. इस कार्यक्रम की शुरुआत के समय धनबाद में पीएम-10 का वार्षिक औसत करीब 300 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था. यह घटकर 171 के करीब पहुंच गया है. यह सामान्य से अभी भी बहुत अधिक है. इसी तरह जमशेदपुर में कार्यक्रम के लागू होने के बाद प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ दिख रहा है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से प्राप्त आंकड़े के अनुसार यहां कार्यक्रम की शुरुआत में प्रदूषण 130 माइक्रो ग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था, यह बढ़कर पिछले साल के औसत प्रदूषण 144 के करीब रहा. इस कार्यक्रम की शुरुआत में रांची का प्रदूषण स्तर (पीएम-10) 140 के आसपास था. यह घटकर 110 के करीब पहुंच गया है. रांची की हवा सुधरी है.
केवल राजधानी के आसपास कट गये 66 हजार से अधिक पेड़
वन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि पिछले पांच वर्षों में राजधानी में 66 हजार पेड़ काट डाले गये. रांची का जंगल क्षेत्र 24 वर्ग किमी घट गया है. कई मैदान गायब हो गये हैं. जलाशयों की साइज भी छोटी हो गयी है. पांच वर्षों में सिर्फ राजधानी में करीब 24 वर्ग किमी (स्टेट फॉरेस्ट रिपोर्ट के अनुसार) जंगल (हरियाली) कम हो चुके हैं. 2021 की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, रांची में 1168 वर्ग किमी में जंगल था. यह 2023 के सर्वे में घट कर 1140 वर्ग किमी हो गया है.
शहर-कुल मिली राशि-खर्च – वर्तमान पीएम-10 स्तर
रांची-93.5-62.6-110
धनबाद-69.09-75.93-171
जमशेदपुर-116.85-51.69-144
(राशि: करोड़ रुपये में, पीएम-10 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर)
शहरों का प्रदूषण गंभीर समस्या
केंद्र सरकार शहरी क्षेत्र में प्रदूषण कम करने के लिए पैसा दे रही है. निकाय चुनाव के दौरान इसको भी प्राथमिकता से लेना चाहिए. शहरों का प्रदूषण एक गंभीर समस्या है. दूसरे देशों में कई निकायों ने अपने यहां के प्रदूषण स्तर को कम किया है.
डॉ मनीष कुमार, निदेशक, सस्टेनेबल भारत फाउंडेशन
