जिले के विभिन्न प्रखंडों में मक्के की फसल पर फॉल आर्मी वर्म (स्पोडोप्टेरा फ्रूजीपर्डा) कीट का संक्रमण मिलने के बाद कृषि विभाग ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है. विभाग ने किसानों को समय रहते कीट की पहचान कर नियंत्रण के उपाय अपनाने की सलाह दी है, ताकि फसल को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके.
तेजी से फैलता है फॉल आर्मी वर्म
कनीय पौधा संरक्षण पदाधिकारी सह कीटनाशी निरीक्षक ने बताया कि फॉल आर्मी वर्म अत्यंत विनाशकारी कीट है. समय पर नियंत्रण नहीं होने पर यह मक्के की फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकता है. मादा पतंगा अपने जीवनकाल में एक हजार से अधिक अंडे देती है, जबकि इसका जीवन चक्र करीब 31 से 35 दिनों का होता है.
यह कीट मक्का के अलावा ज्वार, गन्ना, धान, गेहूं और घास कुल की अन्य फसलों को भी नुकसान पहुंचा सकता है. विभाग ने किसानों से खेतों का नियमित निरीक्षण करने और शुरुआती अवस्था में ही लार्वा को नष्ट करने की अपील की है.
10 से 20 प्रतिशत संक्रमण पर करें नियंत्रण
कृषि विभाग ने किसानों को फसल कटाई के बाद खेत की गहरी जुताई करने और फेरोमोन ट्रैप लगाकर कीटों की निगरानी करने की सलाह दी है. 10 से 20 प्रतिशत से अधिक संक्रमण होने पर केवल अनुशंसित कीटनाशकों का ही इस्तेमाल करने को कहा गया है.
शुरुआती संक्रमण में नीम आधारित अजाडिरेक्टिन और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करने की सलाह दी गयी है. अधिक संक्रमण होने पर स्पाइनेटोराम, क्लोरान्ट्रानिलिप्रोल तथा थायमेथोक्साम मिश्रित रासायनिक दवाओं के इस्तेमाल की अनुशंसा की गयी है. पांचवें और छठे चरण के लार्वा के नियंत्रण के लिए जहरीले चुग्गे के उपयोग की भी सलाह दी गयी है.
किसान कॉल सेंटर से ले सकते हैं जानकारी
कृषि विभाग ने किसानों से किसी भी तरह की परेशानी होने पर कृषि विज्ञान केंद्र बलियापुर, नजदीकी पौधा संरक्षण केंद्र या किसान कॉल सेंटर के टोल फ्री नंबर 1800-123-1136 पर संपर्क करने की अपील की है. किसान सारथी और एनपीएसएस मोबाइल एप के माध्यम से भी खेती और कीट नियंत्रण से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.
