राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीइपी) के तहत वर्ष 2025-26 के मासिक अधिसूचना आंकड़े झारखंड में टीबी संक्रमण की गंभीर तस्वीर पेश कर रहे हैं. राज्य के अधिकांश जिलों में हर महीने बड़ी संख्या में नये मरीज सामने आ रहे हैं.
आंकड़ों से पता चलता है कि धनबाद लगातार सर्वाधिक टीबी मरीजों वाले जिलों में शामिल है. अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक धनबाद में अधिकांश महीनों में 250-370 के बीच नये टीबी मरीजों की पहचान हुई. यह संख्या राज्य के कई जिलों से अधिक है.
केवल रांची, पूर्वी सिंहभूम और कुछ महीनों में पश्चिमी सिंहभूम ही धनबाद से आगे रहे हैं. कोयलांचल क्षेत्र में घनी आबादी, खनन गतिविधियां, धूल-धुएं का प्रभाव, कुपोषण और भीड़भाड़ वाले इलाकों को विशेषज्ञ टीबी के प्रसार की प्रमुख वजह मानते हैं.
धनबाद राज्य के सर्वाधिक टीबी प्रभावित जिलों में शामिल
साल 2025-26 के अधिकांश महीनों में रांची पहले स्थान पर रहा, जहां हर महीने 500 से 780 तक नये मरीज मिले. पूर्वी सिंहभूम दूसरे स्थान पर रहा, जबकि धनबाद, पलामू और पश्चिमी सिंहभूम के बीच तीसरे-चौथे स्थान की प्रतिस्पर्धा दिखाई दी.
मार्च 2026 में धनबाद में 341 नये मरीजों की अधिसूचना हुई. इसी अवधि में रांची में 505, पूर्वी सिंहभूम में 519 और पलामू में 354 मरीज मिले. यह दर्शाता है कि धनबाद अब भी राज्य के सर्वाधिक टीबी प्रभावित जिलों में शामिल है.
कोयलांचल में अधिक क्यों मिल रहे मरीज ?
धनबाद की भौगोलिक और औद्योगिक परिस्थितियां भी चिंता बढ़ाती हैं. जिले में बड़ी संख्या में कोयला खदानें, औद्योगिक इकाइयां और घनी बस्तियां हैं. लंबे समय तक धूल और प्रदूषण के संपर्क में रहने वाले लोगों में फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों का खतरा अधिक रहता है. यही कारण है कि टीबी नियंत्रण कार्यक्रम के लिए धनबाद हमेशा संवेदनशील जिलों की सूची में शामिल रहा है.
आंकड़े धनबाद के लिए चिंता का विषय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अधिक अधिसूचना के दो मायने हो सकते हैं. पहला, जिले में संक्रमण का बोझ अधिक है. दूसरा, स्वास्थ्य विभाग की खोज और स्क्रीनिंग प्रणाली बेहतर काम कर रही है. यदि बड़ी संख्या में मरीज लगातार मिल रहे हैं, तो इसका मतलब है कि संक्रमण की शृंखला अभी पूरी तरह नहीं टूटी है.
टीबी बढ़ने से आय भी प्रभावित
कार्य क्षमता घटने से परिवार की आय प्रभावित होती है. इलाज में लापरवाही से ड्रग रेजिस्टेंट टीबी का खतरा बढ़ता है. संक्रमित व्यक्ति परिवार और समुदाय में बीमारी फैला सकता है. बच्चों और बुजुर्गों में गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं.
कुपोषण और टीबी एक-दूसरे को बढ़ावा देते हैं. औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों की उत्पादकता प्रभावित होती है. स्वास्थ्य व्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है.
नयी रणनीति के तहत टीबी हॉटस्पॉट मैपिंग की जरूरत
धनबाद में टीबी नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग को वार्ड और पंचायत स्तर पर टीबी हॉटस्पॉट मैपिंग शुरू करनी चाहिए. हॉटस्पॉट में विशेष स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा सकता है. इसके अलावा कोलियरी क्षेत्रों में मोबाइल एक्स-रे वैन चलायी जाए.
मजदूर बस्तियों में मासिक टीबी जांच अभियान हो. पोषण सहायता योजनाओं की निगरानी बढ़ायी जाए. टीबी से ठीक हो चुके मरीजों को जागरूकता अभियान से जोड़ा जाए. स्कूलों और औद्योगिक इकाइयों में नियमित स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था हो.
झारखंड में टीबी की तस्वीर
राज्य स्तर पर अप्रैल 2025 में 5927 मरीजों की अधिसूचना हुई थी, जबकि मार्च 2026 में यह संख्या बढ़कर 6408 पहुंच गयी. यह दर्शाता है कि टीबी अब भी झारखंड के लिए बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है. रांची, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, पलामू और धनबाद जैसे जिले राज्य के कुल टीबी बोझ में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखते हैं.
