होली पर घर जाने वालों की धनबाद स्टेशन पर उमड़ी भीड़, दर्जनों लोगों की छूटी ट्रेन

Holi Rush: होली पर घर जाने वालों की झारखंड के धनबाद स्टेशन पर भारी भीड़ उमड़ी. हटिया-गोरखपुर मौर्य एक्सप्रेस में चढ़ने के लिए यात्रियों में अफरातफरी रही. जनरल और स्लीपर कोच पूरी तरह भरे रहे, कई लोग ट्रेन में सवार नहीं हो सके. आरपीएफ की अपील के बावजूद अव्यवस्था बनी रही. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

धनबाद से धर्मेंद्र की रिपोर्ट

होली के त्योहार पर अपने घर जाने वालों की भीड़ ट्रेनों में उमड़ रही है. वहीं ट्रेनों में लंबी वेटिंग के कारण लोग परेशान हैं. रविवार की रात करीब 9.50 बजे धनबाद रेलवे स्टेशन पर हटिया-गोरखपुर मौर्य एक्सप्रेस के प्रवेश करते ही उसमें सवार होने के लिए यात्रियों को भारी मशक्कत करनी पड़ी. महिला-पुरुषों के साथ बच्चे भी जनरल बोगियों में सवार होने के लिए आपाधापी करते दिखे. वहीं, लंबी वेटिंग के कारण सीट कन्फर्म नहीं हुई, तो यात्री जनरल बोगियों में घुस गए.

मौर्य एक्सप्रेस की जनरल बोगियां प्लेटफॉर्म पर रुकने से पहले ही भरी पड़ी थीं. स्थिति यह थी कि जनरल बोगी में पैर रखने तक की जगह नहीं थी, लेकिन लोग किसी तरह उसमें प्रवेश करने की जद्दोजहद कर रहे थे. कुछ लोगों ने स्लीपर कोच में ही जगह बना ली. वहीं, अनेक लोग ट्रेन में सवार तक नहीं हो पाए और प्लेटफार्म पर ही रुक गये.

स्लीपर कोच में सवार हुए लोग

स्टेशन आरपीएफ की टीम लोगों से संयम बरतने के अपील करती रही, लेकिन लोग कुछ सुनने को तैयार नहीं थे. सभी स्लीपर कोच की स्थिति जनरल जैसी हो गई थी. कोई दो सीटों के बीच खाली फर्श पर, तो कोई शौचालय के पास या दरवाजे पर खड़ा होकर यात्रा करता दिखा.

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महिला कोच में घुस गए पुरुष

भीड़ के कारण महिला कोच में भी पुरुष प्रवेश कर गये. इस पर कुछ महिलाओं ने हो-हल्ला भी किया, पर पुरुष यात्री नहीं उतरे. यही नहीं दिव्यांग कोच में भी आम लोग चढ़ गये. ऐसे में दिव्यांग यात्रियों को परेशानी हुई.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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