धनबाद, सीबीएसइ, आइसीएसइ, जैक समेत देश के विभिन्न राज्यों के 12वीं बोर्ड परीक्षा परिणाम घोषित हो चुके हैं. हजारों विद्यार्थी की नजर अब स्नातक (यूजी) नामांकन प्रक्रिया पर टिकी हुई है. विशेष रूप से धनबाद और बोकारो जिले के विद्यार्थियों को बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय (बीबीएमकेयू) के कॉलेजों में नामांकन प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार है. हालांकि इस बार नामांकन प्रक्रिया में एक से दो सप्ताह की देरी होने की आशंंका जतायी जा रही है. विश्वविद्यालय प्रशासन को फिलहाल राज्य सरकार से क्लस्टरिंग सिस्टम पर अंतिम मंजूरी मिलने का इंतजार है. जानकारी के अनुसार क्लस्टरिंग सिस्टम को लेकर राज्य कैबिनेट से स्वीकृति मई माह के अंत तक मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अब तक मंजूरी नहीं मिल सकी है. ऐसे में विश्वविद्यालय के अधिकारी मान रहे हैं कि यूजी नामांकन प्रक्रिया जून के दूसरे सप्ताह में शुरू होने की जो संभावना थी, वह आगे खिसक सकती है.
सीटों की कमी नहीं, विद्यार्थियों को मिलेगी राहत
इस बीच सीटों की उपलब्धता को लेकर विद्यार्थियों को राहत मिल सकती है. बीबीएमकेयू के 14 अंगीभूत कॉलेजों में यूजी स्तर पर 22 हजार से अधिक सीटें उपलब्ध रहने की संभावना है. वहीं विश्वविद्यालय से संबद्ध 24 कॉलेजों में भी 20 हजार से अधिक सीटें हैं. ऐसे में अधिकांश विद्यार्थियों को अपनी पसंद के विषय और कॉलेज में प्रवेश का अवसर मिलने की उम्मीद है.
चास कॉलेज में सबसे अधिक सीटें
अंगीभूत कॉलेजों में सबसे अधिक 2500 के करीब सीटें चास कॉलेज चास में प्रस्तावित हैं. इसके बाद आरएस मोर कॉलेज गोविंदपुर में 2400, पीके रॉय मेमोरियल कॉलेज धनबाद में 2200 और एसएसएलएनटी महिला कॉलेज धनबाद में 2300 सीटें संभावित हैं. बीएसके कॉलेज, मैथन में 200, बीएस सिटी कॉलेज, बोकारो में 1800 सीटें हैं. आरएसपी कॉलेज झरिया, सिंदरी कॉलेज, केबी कॉलेज बेरमो और कतरास कॉलेज में लगभग 1500 – 1500 सीटें उपलब्ध रहने की संभावना है. वहीं डिग्री कॉलेज झरिया, गोमिया, टुंडी और नावाडीह में 900-900 सीटों की व्यवस्था प्रस्तावित है. इससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा का अवसर मिलेगा.
चांसलर पोर्टल खुलने के बाद शुरू होगी प्रक्रिया
कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद ही चांसलर पोर्टल को नामांकन के लिए खोला जायेगा. इसके बाद विद्यार्थियों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किये जायेंगे. विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि सभी तैयारियां लगभग पूरी हैं, लेकिन अंतिम प्रक्रिया राज्य सरकार की स्वीकृति पर निर्भर है.
