देवघर के स्कूलों में 30 मिनट का Read-a-Thon, बच्चों के साथ शिक्षक-अभिभावक भी बने पाठक

देवघर जिले के स्कूलों में 'मेरे शब्द मेरी कहानी' अभियान के तहत एक अनूठा रीड-ए-थॉन कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसमें बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों और अभिभावकों ने भी 30 मिनट तक सामूहिक रूप से पठन कर पठन संस्कृति को मजबूत किया.

वरीय संवाददाता | देवघर: ‘मेरे शब्द मेरी कहानी’ अभियान के तहत मंगलवार को जिले के सभी संबंधित विद्यालयों में रीड-ए-थॉन कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम के दौरान विद्यालयों में सामूहिक पठन से उत्साहपूर्ण माहौल देखने को मिला.

विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों और अभिभावकों ने भी कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभाई. निर्धारित समय पर सभी प्रतिभागी एक साथ बैठे और करीब 30 मिनट तक पुस्तकों, कहानियों और अन्य पठन सामग्री का अध्ययन किया.

कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में नियमित पढ़ने की आदत विकसित करने के साथ विद्यालय और समुदाय में पठन की संस्कृति को मजबूत करना था.

एक साथ बैठे बच्चे, शिक्षक और अभिभावक

रीड-ए-थॉन के दौरान विद्यालयों में बच्चों ने समूह में बैठकर पठन किया. शिक्षकों और अभिभावकों की भागीदारी ने कार्यक्रम को और प्रभावी बनाया.

सामूहिक पठन के माध्यम से बच्चों में पढ़ने को लेकर रुचि बढ़ाने और उन्हें पुस्तकों से जोड़ने का प्रयास किया गया.

शिक्षा विभाग के निर्देश पर हुआ आयोजन

झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद, रांची के निर्देश पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इसे लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी-सह-जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, समग्र शिक्षा अभियान, देवघर की ओर से सभी प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारियों और प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए गए थे.

विद्यालयों को कार्यक्रम से संबंधित तस्वीरें तिथि और समय सहित निर्धारित माध्यम से अपलोड करने के लिए भी कहा गया था.

पढ़ने से मजबूत होती है बच्चों की सीखने की क्षमता

नियमित पठन से बच्चों में धाराप्रवाह पढ़ने और पढ़ी हुई सामग्री को समझने की क्षमता विकसित होती है. कहानियों और कविताओं के अध्ययन से उनकी कल्पनाशक्ति, रचनात्मकता और स्मरण शक्ति को बढ़ावा मिलता है.

पुस्तकों के माध्यम से बच्चों का शब्द भंडार समृद्ध होता है. इससे बोलने और लिखने की क्षमता में भी सुधार आता है. नियमित पठन बच्चों में एकाग्रता, धैर्य और आत्म-अनुशासन विकसित करने में मदद करता है.

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सामूहिक पठन से बढ़ता है आत्मविश्वास

सामूहिक रूप से पढ़ने से बच्चों में पठन को लेकर झिझक और संकोच कम होता है. जब शिक्षक और अभिभावक भी बच्चों के साथ बैठकर पढ़ते हैं, तो बच्चों का उत्साह बढ़ता है और उनमें आत्मविश्वास विकसित होता है.

इस तरह रीड-ए-थॉन केवल एक दिन का पठन कार्यक्रम न रहकर बच्चों को किताबों से जोड़ने और उनके शैक्षणिक एवं बौद्धिक विकास की मजबूत नींव तैयार करने की पहल के रूप में सामने आया.

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By Ajay yadav

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