देवघर में घूसखोर JE पर गिरी गाज! बिल पास करने के नाम पर मांग रहा था रिश्वत, ACB ने दबोचा

Deoghar Crime News: देवघर जिले के करौं प्रखंड में मनरेगा जेई संतोष कुमार को 5,000 रुपये की घूस लेते हुए दुमका एसीबी की 20 सदस्यीय टीम ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया है. वह टीसीबी योजना का बिल पास कराने के नाम पैसे ले रहा था. पढ़ें, एसीबी ने पकड़ने के लिए कैसे बिछाया जाल?

दुमका के करौं से बलराम की रिपोर्ट

Deoghar Crime News, देवघर : भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एसीबी (ACB) दुमका की टीम ने बुधवार को करौं प्रखंड कार्यालय में पदस्थापित मनरेगा जूनियर इंजीनियर (JE) संतोष कुमार को 5,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया. जेइ ने एक लाभुक से योजना का बिल (विपत्र) पास करने के एवज में इस राशि की मांग की थी. एसीबी की टीम गिरफ्तार करने के बाद आरोपी इंजीनियर को अपने साथ दुमका ले गई है.

7,000 रुपये की मांगी थी घूस

जानकारी के अनुसार, करौं प्रखंड के डिंडाकोली पंचायत अंतर्गत लकरछरा गांव में एक लाभुक भीम राणा की टीसीबी (Trench Cum Bunding) योजना स्वीकृत हुई थी. इस कार्य का सरकारी बिल बनाने के लिए जेई संतोष कुमार लाभुक से लगातार 7,000 रुपये की घूस मांग रहा था. लाभुक ने बताया कि उसने 2,000 रुपये पहले ही जेई को दे दिए थे, लेकिन बाकी के 5,000 रुपये जुगाड़ न होने के कारण वह बेहद परेशान था.

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सादे लिबास में पहुंची 20 सदस्यीय टीम

परेशान होकर लाभुक भीम राणा ने करीब दो सप्ताह पहले इसकी लिखित शिकायत दुमका एसीबी कार्यालय में की थी. शिकायत मिलने के बाद एसीबी की टीम ने अपने स्तर से मामले की गुप्त छानबीन की और मामला सही पाया. दूसरी तरफ जेई संतोष कुमार ने बुधवार को लाभुक से पैसे लेकर अपने प्रखंड कार्यालय परिसर स्थित सरकारी क्वार्टर में बुलाया था. उन्होंने इसकी सूचना तुरंत एसीबी को दी. जिसके बाद एसीबी की 20 सदस्यीय टीम सादे लिबास में करौं प्रखंड पहुंची. टीम ने लाभुक को केमिकल (पाउडर) लगे 5,000 रुपये के नोट दिए. जैसे ही लाभुक ने क्वार्टर में जाकर जेइ को पैसे दिए, घात लगाकर बैठी एसीबी की टीम ने उसे दबोच लिया. गिरफ्तारी के बाद जब जेइ संतोष कुमार के हाथों को केमिकल वाले पानी से धुलवाया गया, तो पानी का रंग तुरंत लाल हो गया, जो रिश्वत लेने का पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण है.

अधिवक्ता विश्वनाथ रवानी ने की लाभुक की मदद

भ्रष्टाचार के इस खेल को उजागर करने में लाभुक भीम राणा ने बताया कि पूरे मामले में भाजपा किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष सह अधिवक्ता विश्वनाथ रवानी ने शुरू से ही उसकी काफी कानूनी और नैतिक मदद की. उन्हीं के सहयोग और मार्गदर्शन के कारण वह एसीबी तक पहुंच पाया और इस भ्रष्ट इंजीनियर को सलाखों के पीछे भिजवाया जा सका.

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Published by: Sameer Oraon

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