देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रत्येक धाम की पूजा-पद्धति और धार्मिक परंपराएं अलग-अलग हैं, लेकिन झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम की 'कच्चा जल पूजा' अपनी विशिष्टता के कारण पूरे देश में अलग पहचान रखती है. बाबा बैद्यनाथ को 'मनोकामना बैद्यनाथ' के नाम से भी जाना जाता है. श्रद्धालुओं की मान्यता है कि जो भक्त सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ बाबा के दरबार में अपनी प्रार्थना लेकर आते हैं, उनकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है. यही वजह है कि बैद्यनाथ धाम में वर्षभर सावन जैसा आस्था का माहौल बना रहता है. वहीं, राजकीय श्रावणी मेले में हर साल कांवरियों और श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है.
मंदिर का पट खुलते ही होती है कच्चा जल पूजा
बाबा मंदिर की सबसे प्राचीन और अनूठी परंपराओं में शामिल कच्चा जल पूजा प्रतिदिन प्रातःकाल मंदिर का पट खुलते ही आरंभ होती है. इस पूजा में केवल स्थानीय पुरोहित समाज के महिला, पुरुष और बच्चे ही शामिल होते हैं. इस दौरान बाबा बैद्यनाथ का केवल शुद्ध जल से अभिषेक किया जाता है. लगभग 20 से 30 मिनट तक चलने वाली इस विशेष पूजा के दौरान वातावरण वैदिक मंत्रोच्चार और शिवभक्ति से गुंजायमान रहता है.
महाप्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं जल
पूजा के बाद बाबा पर अर्पित जल को श्रद्धालु महाप्रसाद स्वरूप चरणामृत के रूप में ग्रहण करते हैं. इस चरणामृत को लेकर विशेष धार्मिक मान्यता है कि यह वर्षों तक सुरक्षित रहता है. न तो इसमें किसी प्रकार की दुर्गंध आती है और न ही यह खराब होता है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस चरणामृत के सेवन से बाबा की कृपा बनी रहती है तथा व्यक्ति निरोग और सुखी जीवन प्राप्त करता है.
देश-विदेश से आते हैं श्रद्धालु
धार्मिक मान्यताओं, अनूठी पूजा-पद्धति और अटूट आस्था का संगम ही बाबा बैद्यनाथ धाम को देश के प्रमुख शिवधामों में विशिष्ट स्थान दिलाता है. यही कारण है कि यहां हर दिन देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु बाबा के दर्शन और जलार्पण के लिए पहुंचते हैं.
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