आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले बच्चों के पोषाहार पर संकट

पोषाहार को नियमित रूप से संचालित रखने के लिए सेविकाओं पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है.

इटखोरी. इटखोरी बाल विकास परियोजना क्षेत्र के प्रखंडो (इटखोरी, मयूरहंड, पत्थगड्डा, गिद्धौर ) के आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले बच्चों व गर्भवती महिलाओं को मिलने वाले पोषाहार पर संकट छा गया है. पोषाहार को नियमित रूप से संचालित रखने के लिए सेविकाओं पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है. सेविकाओं ने दो दिन शुक्रवार व शनिवार को पोषाहार बंद कर दिया, उसके बाद विभागीय आश्वासन के बाद सोमवार को पोषाहार चालू किया गया. जानकारी के अनुसार, सेविकाओं को वर्ष 2025 के द्वितीय तिमाही जून माह तक ( नवंबर में दिया गया था) का चावल उपलब्ध कराया गया था. उसके बाद चावल उपलब्ध नहीं होने के कारण पोषाहार संचालन में परेशानी हो रही है. नियमित रूप से चावल उपलब्ध नहीं कराये जाने पर सेविकाओं ने गड़बड़ी की आशंका जतायी है. एक सेविका ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि हमलोगों को नवंबर 2025 में प्रथम तिमाही (जनवरी, फरवरी, मार्च माह) का चावल दिया गया था, जबकि चावल निर्गत पंजी में द्वितीय तिमाही (अप्रैल, मई, जून) का हस्ताक्षर कराया गया. सेविका ने कहा कि हमलोगों को एक साल पीछे का चावल उपलब्ध कराया गया है, चावल के अभाव में पोषाहार संचालित करना मुश्किल हो रहा है. सीडीपीओ ने कहा : सीडीपीओ अर्चना सिंह ने कहा कि एसएफसी द्वारा उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार, सेविकाओं को चतुर्थ तिमाही का चावल उपलब्ध करा दिया गया है, यह भ्रम व चूक कहां हुई है, इसकी जांच की जा रही है. सुपरवाइजर के केंद्र निरीक्षण के दौरान जितने बच्चे भौतिकी रूप से उपस्थित रहते हैं, उसी के अनुसार चावल उपलब्ध होता है. व्यय के बाद जितना चावल बचता है, उसी अनुसार अगले महीने चावल दिया जाता है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Deepesh kumar

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
और पढ़ें
Tags

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >