बिना पूंजी लगाये आमदनी का जरिया है महुआ का कारोबार

बिना पूंजी लगाये आमदनी का जरिया है महुआ का कारोबार

धर्मेंद्र कुमार

सिमरिया. प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्र के अधिकतर लोग महुआ फल चुन कर तीन माह का राशन की जुगाड़ करते हैं. महुआ बिना पूंजी का व्यापार है. गर्मी शुरू होते ही महुआ का फल गिरना शुरू हो जाता है. एक माह तक लोग महुआ चुन कर अच्छी आमदनी करते हैं. सुबह से लेकर दोपहर तक पूरे परिवार के साथ महुआ चुनते हैं. महुआ चुन कर 15 से 20 हजार रुपये की आमदनी करते हैं, जिससे तीन माह का जीविकोपार्जन चलता है. इसके अलावा घर के अन्य कार्यों को करते हैं. बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पर होने वाला खर्च भी निकल जाता है. प्रखंड में हर साल एक करोड़ से अधिक का इसका कारोबार होता है. ग्रामीण महुआ सुखा कर व्यापारी को बेचते हैं. 40 से 50 रुपये प्रति किलो महुआ की बिक्री होती है. प्रखंड में 20 हजार से अधिक महुआ के पेड़ हैं. रैयती भूमि के अलावा वन क्षेत्र में महुआ का पेड़ है.

दूसरे प्रदेश गये लोग महुआ के मौसम में गांव आ जाते हैं

काम की तलाश में दूसरे प्रदेश गये लोग महुआ के इस मौसम में अपने गांव लौट आते हैं और लगभग एक माह घर पर रह कर महुआ चुनते हैं. पूरे परिवार के साथ दिनभर महुआ चुनते हैं. महुआ चुनने में माता-पिता का सहयोग बच्चे भी करते हैं. यही वजह है कि इस मौसम में स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति कम हो जाती है. बच्चे महुआ चुनने में मशगूल रहते हैं.

महुआ की बिक्री से अच्छी आमदनी होती है : ग्रामीण

महिला गेंदिया देवी ने कहा कि हर साल पूरे परिवार के साथ महुआ चुनते हैं. एक सीजन में महुआ से 10 से 15 हजार रुपये की आमदनी होती है. सुनीता देवी ने कहा कि इस बार कम मात्रा में महुआ गिर रहा है. सुबह महुआ चुनने घर से निकल जाते हैं. महुआ से 10 हजार की आमदनी होती है. विजय प्रसाद ने कहा कि 10 से 15 हजार रुपये की आमदनी होती है. इससे चार माह का गुजारा हो जाता है. सुकर महतो ने कहा कि महुआ के मौसम आने का इंतजार सालों भर करते हैं. महुआ से अच्छी आमदनी होती है, जिससे घर परिवार चलता है. कैलाश प्रसाद, रामू प्रसाद, भेखलाल महतो, जीतन भुईयां, मोहन महतो ने भी कहा कि महुआ चुन कर अच्छी आमदनी करते हैं.

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By Prabhat khabar news desk

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