तेजी से सूख रहा डहुरी डैम, सिंचाई संकट से जूझ रहे किसान

हेरूआ जलाशय के रूप में प्रसिद्ध डहुरी डैम आज खुद बदहाली का शिकार है.

दीनबंधू, चतरा हेरूआ जलाशय के रूप में प्रसिद्ध डहुरी डैम आज खुद बदहाली का शिकार है. तेजी से सूखते जलस्तर और टूटे फाटकों की वजह से डैम का पानी व्यर्थ बह रहा है. नहरों की जर्जर स्थिति ने हालात और बिगाड़ दिए हैं. सिंचाई की सुविधा न होने से किसान गंभीर संकट में हैं, हजारों एकड़ खेत खाली पड़े हैं और नकदी फसलों की बुआई नहीं हो पा रही है. डहुरी डैम, जो 1982 में बनाया गया था और कभी 2400 एकड़ भूमि को सिंचित करता था, आज उपेक्षा और विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ गया है. जल पथ प्रमंडल, हजारीबाग के अधीन यह डैम अब सिर्फ कागजों में जीवित नजर आ रहा है. अतिक्रमण से सिमटता जा रहा डैम का दायरा 88 हेक्टेयर में फैला यह डैम अब अतिक्रमण की चपेट में है. हर साल कुछ लोग डैम की जमीन पर गेहूं व अन्य फसलों की खेती कर रहे हैं. विभाग का इस ओर कोई ध्यान नहीं है, जिससे डैम का वास्तविक क्षेत्रफल कम होता जा रहा है. डहुरी गांव को नहीं मिला डैम का लाभ विडंबना यह है कि डैम डहुरी गांव में बना है, लेकिन इस गांव के लोगों को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है. पानी का लाभ कसियाडीह, टिकर, चंगेर, दारियातु, बरवाडीह, लेम पंचायतों तक ही सीमित रह गया है. भरत यादव ने कहा कि गांव के लोगों को उम्मीद थी कि डैम बनने से फायदा होगा, लेकिन आज तक कुछ नहीं मिला. मत्स्य पालन भी हुआ प्रभावित मत्स्य पालक चंद्रदेव यादव ने कहा कि पानी कम होने की वजह से मत्स्य पालन ठप पड़ गया है, जिससे कारोबार में भारी नुकसान हो रहा है. मत्स्यजीवी समिति भी पानी की कमी से परेशान है. किसानों का दर्द: टूटे नहर, बर्बाद होती मेहनत ओबरा गांव के किसान छोटू यादव, अर्जुन यादव, ईश्वर यादव, प्रभु यादव और जगदीश यादव ने बताया कि नहरों की टूट-फूट और पानी के व्यर्थ बहने से खेती पूरी तरह से परती हो गयी है. मजबूरी में लोगों को रोजगार के लिए पलायन करना पड़ रहा है. जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से समाधान की उम्मीद किसानों ने प्रशासन से डैम की मरम्मत, फाटक और चैनल की जल्द सुधार की मांग की है. साथ ही नहरों की मरम्मत और अतिक्रमण हटाने की भी आवश्यकता बतायी है. यदि जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो यह डैम किसानों के लिए एक इतिहास बनकर रह जायेगा.

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By DEEPAK

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