चतरा. डीएमएफटी प्रशिक्षण हॉल में रविवार को जिला ग्राम सभा मंच के द्वारा एक दिवसीय वार्षिक सम्मेलन का आयोजन किया गया. इसमें मुख्य अतिथि के रूप में एफआरए सेल सदस्य अखोरी प्रभास, जेजेबीए सेंट्रल प्रभारी राजेश महतो, सोहनलाल कुम्हार, रांची के कुंदन गुप्ता, प्रकाश भारती, अधिवक्ता अर्जुन महतो, अधिवक्ता विरेंद्र तिवारी, अधिवक्ता निर्मल दांगी समेत अन्य शामिल हुए. इस दौरान वन अधिकार अधिनियम 2006 नियम 2008 संशोधित नियम 2012 को लागू करने पर चर्चा किया गया.
वनपट्टा देने में भेदभाव का लगाया आरोप
मुख्य अतिथि श्री प्रभास ने कहा कि जिला स्तरीय व अनुमंडल स्तरीय वनाधिकार समिति द्वारा सिर्फ बैगा, बिरहोर व आदिवासी को रकवा कटौती कर के वनपट्टा दिया जा रहा है. अन्य परंपरागत वन निवासी को एक भी व्यक्तिगत वनपट्टा नहीं दिया गया है, जो वनाधिकार अधिनियम का उल्लंघन है.
पौधारोपण के नाम पर बेदखली का आरोप
मंच के जिला प्रभारी अशोक भारती ने कहा कि वन विभाग के द्वारा आदिवासी व अन्य परंपरागत निवासी को वर्षों से खेती कर अपने परिवारों को गुजर-बसर कर रहे लोगों को पौधारोपण के नाम पर जबरन केस की धमकी देकर ट्रेंच, पीट व गड्ढा खोदकर बेदखल किया गया है. साथ ही अतिक्रमण के नाम पर फर्जी मुकदमा दर्ज किया जा रहा है.
गैर-मजरूआ जमीन की रसीद जारी करने की मांग
गैर-मजरूआ जमीन का 2014 तक रसीद कटते आ रहा था, उसे पुनः रसीद निर्गत करने की मांग की गयी. भारतमाता परियोजना में विकास के नाम पर विस्थापित किये जा रहे लोगों को पुनर्वास नीति के तहत उचित मुआवजा व अन्य लाभ देने की मांग किया गया.
शोषण नहीं रुका तो आंदोलन की चेतावनी
साथ ही वन विभाग द्वारा वनवासियों को किया जा रहा शोषण पर रोक नहीं लगी तो आंदोलन की चेतावनी दी. 23 अक्टूबर को रांची मोरहाबादी मैदान में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर समस्याओं से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को अवगत कराने का निर्णय लिया गया.
सम्मेलन में महिला-पुरुषों ने लिया हिस्सा
सम्मेलन की अध्यक्षता मंच के जिलाध्यक्ष अंजु देवी व संचालन सिकंदर खरवार ने किया. मौके पर प्रेमलाल महतो, मोनिका गोरिया, बसंत भारती, लखन सिंह, चिंता देवी, खुशियाल दांगी, विनिता देवी, रीता देवी समेत काफी संख्या में महिला-पुरूष उपस्थित थे.
