खतरे में ओडिशा-झारखंड की लाइफलाइन, जर्जर हुआ जैंतगढ़ वैतरणी पुल, प्रशासन मौन

ओडिशा और झारखंड को जोड़ने वाला जैंतगढ़ वैतरणी पुल जर्जर हो चुका है। लोहे की सरिया बाहर निकलने और गहरे गड्ढों के कारण लोग जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे हैं।

25 साल पुराने पुल से बाहर निकलीं लोहे की सरिया, बंद पड़े हैं पानी निकासी के हॉल, ओवरलोडेड वाहनों से बढ़ रहा खतराजान हथेली पर रखकर जैंतगढ़ वैतरणी पुल पार कर रहे लोग, छोटे वाहनों के गुजरने पर भी हिल रहा ढांचा

जैंतगढ़. झारखंड और ओडिशा को जोड़ने वाला अति महत्वपूर्ण ''जैंतगढ़ वैतरणी पुल'' इस समय बेहद खतरनाक स्थिति में है. करीब 25 वर्ष पूर्व पवित्र वैतरणी नदी पर बना यह पुल पिछले तीन वर्षों से लगातार जर्जर हो रहा है. आलम यह है कि पुल पर अनगिनत गड्ढे हो चुके हैं, जिनसे अब लोहे की कंक्रीट वाली सरिया बाहर निकल आयी है. बरसात के इस मौसम में जलजमाव के कारण लोग जान हथेली पर लेकर इसे पार कर रहे हैं, और आये दिन बाइक सवार दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं. छोटे वाहनों के गुजरने पर भी पुल में तेज कंपन होती है.

क्यों खास है यह पुल: यह पुल दोनों राज्यों की राजधानियों समेत दर्जनों बड़े शहरों को जोड़ता है. जोड़ा-बड़बिल खनन क्षेत्र का कच्चा माल इसी मार्ग से झारखंड पहुंचता है. जैंतगढ़ और चंपुआ के लोगों के लिए यह आवागमन का एकमात्र साधन यानी ''लाइफलाइन'' है.

पुल के क्षतिग्रस्त होने के मुख्य कारणपुल के पानी निकासी वाले एक्जिट हॉल पूरी तरह बंद हैं, जिससे बारिश का पानी पुल पर ही जमा रहता है और इसे कमजोर कर रहा है. एप्रोच सड़क के दोनों किनारों पर 50 फीट गहरे जानलेवा गड्ढे हो गये हैं. भारी वाहनों के लिए कोई अधिकतम भार क्षमता तय नहीं है. ''नो एंट्री'' के वक्त 50-60 टन वजन लदे दर्जनों ट्रेलर घंटों इस जर्जर पुल पर खड़े रहते हैं. पिछले वर्ष जगन्नाथपुर विधायक सोनाराम सिंकू ने विधानसभा में यह मामला उठाया था और अपने स्तर से गड्ढे भरवाए थे. स्थानीय युवकों ने भी श्रमदान किया था. यहां तक कि अप्रैल माह में सूबे के मंत्री दीपक बिरुआ ने भी पुल निर्माण की घोषणा की थी, लेकिन धरातल पर स्थिति अब भी जस की तस बनी हुई है.


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Author: Md Nadeem

Published by: Janardan Pandey

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