प्रतिनिधि, जैंतगढ़
एक ओर जहां शिक्षा विभाग स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर कई स्कूलों में पढ़ाई की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. अधिकांश विद्यालयों में शिक्षकों की कमी और प्रधान शिक्षकों के कार्यालयी कामों में व्यस्त रहने को लेकर कांग्रेस युवा मोर्चा के जिला महासचिव गुलजार अंसारी ने चिंता जताई है.
एकल शिक्षक विद्यालयों में पढ़ाई व्यवस्था पर सवाल
गुलजार अंसारी ने आरोप लगाया कि कई स्कूल पहले से ही एकल शिक्षक व्यवस्था पर चल रहे हैं, जबकि कुछ विद्यालय प्रतिनियोजन पर निर्भर हैं. ऐसे में प्रधान शिक्षकों के कार्यालयी कार्यों में अधिक समय देने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. उन्होंने कहा कि कई स्कूलों में विज्ञान, गणित और अंग्रेजी जैसे विषयों की नियमित पढ़ाई नहीं हो पा रही है.
उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए प्रधान शिक्षकों को रिपोर्ट तैयार करने और अन्य कार्यालयी कार्यों के दबाव से मुक्त करने की जरूरत है. उनका कहना है कि प्रधान शिक्षकों से क्लर्क की तरह काम लेने के बजाय उन्हें बच्चों की पढ़ाई और स्कूल की गुणवत्ता सुधार पर ध्यान देने का अवसर मिलना चाहिए.
गुलजार अंसारी ने बताया कि वह जल्द ही मुख्यमंत्री से मिलकर प्रत्येक प्राथमिक और मध्य विद्यालय में संविदा पर क्लर्क की नियुक्ति की मांग करेंगे, ताकि प्रधान शिक्षकों को कार्यालयी कामों से राहत मिल सके और वे पूरा समय बच्चों को दे सकें.
क्या बोले सामाजिक कार्यकर्ता और नेता
गुरबक्श अहलुवालिया, मानव अधिकार कार्यकर्ता
उन्होंने कहा कि झारखंड की शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की जरूरत है. प्रधान शिक्षकों को रिपोर्ट और मध्याह्न भोजन संचालन जैसे कार्यों से मुक्त किया जाए तो शिक्षा व्यवस्था में सुधार आ सकता है.
सत्यपाल बेहरा, भाजपा नेता
उन्होंने सुझाव दिया कि ओडिशा की तर्ज पर प्रधान शिक्षकों को स्कूल समय के अलावा रिपोर्ट तैयार करने का समय दिया जाए. स्कूल अवधि में उन्हें केवल बच्चों की पढ़ाई और जरूरी शैक्षणिक कार्यों पर ध्यान देना चाहिए.
विनय साह, समाजसेवी
उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि गरीब बच्चों की शिक्षा को मजबूत करने के लिए स्कूलों में पढ़ाई, संसाधन और सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है.
