पश्चिमी सिंहभूम जिले में आमजन को सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन लगातार सक्रिय है. इसी कड़ी में उपायुक्त मनीष कुमार ने सदर अस्पताल चाईबासा के इमरजेंसी वार्ड का औचक निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं, दवाओं की उपलब्धता, बेड प्रबंधन और साफ-सफाई का विस्तृत जायजा लिया.
मरीजों से लिया फीडबैक, डॉक्टरों को संवेदनशीलता के निर्देश
निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने वार्ड में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों से सीधा संवाद कर उनका हालचाल जाना. उन्होंने अस्पताल की सुविधाओं और इलाज को लेकर मरीजों से फीडबैक लिया. उपायुक्त ने अस्पताल प्रबंधन को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि आपातकालीन सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. मरीजों का त्वरित पंजीकरण और जांच सुनिश्चित की जाए. उन्होंने डॉक्टरों को मरीजों के प्रति संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की हिदायत दी.
मलेरिया उन्मूलन के लिए सीएसआर मद से मिलीं मच्छरदानियां
निरीक्षण के बाद उपायुक्त ने सिविल सर्जन कार्यालय को कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व मद के तहत 1000 मच्छरदानियां सौंपी. उपायुक्त ने बताया कि पश्चिमी सिंहभूम जिला मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में आता है. सुदूरवर्ती ग्रामीणों को सुरक्षित रखने के लिए सीएसआर मद से कुल 10,000 मच्छरदानियों की व्यवस्था की गयी है, जिसकी पहली खेप (1000 मच्छरदानियां) स्वास्थ्य विभाग को दे दी गयी है. इन्हें प्राथमिकता के आधार पर जरूरतमंद परिवारों में बांटा जाएगा. उपायुक्त ने नागरिकों से अपील की कि वे मलेरिया और डेंगू से बचाव के लिए नियमित रूप से मच्छरदानी का प्रयोग करें. आसपास जलजमाव न होने दें और लक्षण दिखने पर तुरंत सरकारी अस्पताल में जांच कराएं. इस निरीक्षण के दौरान उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार, प्रशिक्षु आइएएस इरा जोरवाल, सिविल सर्जन डॉ. जुझार माझी समेत कई चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी मुख्य रूप से उपस्थित थे.
