बोकारो: प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय पिंड्राजोरा तथा सिवनडीह को सरकार के आदेश के अनुसार बंद कर दिया गया है। विभागीय संकल्प संख्या-739, दिनांक 19 जून 2026 के तहत पिंड्राजोरा एवं सिवनडीह स्थित प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालयों के स्वीकृत पद प्रत्यर्पित कर दिए गए हैं। इसके बाद 31 जुलाई को यहां पदस्थापित दोनों पशु चिकित्सा पदाधिकारियों ने अपने पद का परित्याग कर नए पदस्थापन स्थल पर योगदान दे दिया। इसके साथ ही दोनों चिकित्सालयों में नियमित पशु चिकित्सा सेवा पूरी तरह ठप हो गई है।
इस स्थिति के बाद चास प्रखंड की 54 पंचायतों के लाखों पशुपालकों के लिए पशुओं के इलाज की व्यवस्था लगभग केवल चास प्रखंड मुख्यालय स्थित मॉडल पशु चिकित्सालय तक सीमित होती नजर आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र नए चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं हुई तो क्षेत्र में पशुपालन पर गंभीर असर पड़ेगा।
तीन चिकित्सालयों में से दो हुए डॉक्टरविहीन
जानकारी के अनुसार, चास प्रखंड में पिंड्राजोरा एवं सिवनडीह क्षेत्र में कुल तीन पशु चिकित्सालय संचालित थे। हाल ही में हुए प्रशासनिक स्थानांतरण के दौरान यहां कार्यरत पशु चिकित्सा पदाधिकारियों को अन्य स्थानों पर भेज दिया गया। उनके स्थान पर अब तक नए चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं की गई है। परिणामस्वरूप दोनों चिकित्सालयों में पशुओं का उपचार, दवा वितरण तथा अन्य नियमित सेवाएं पूरी तरह बंद हो गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि डॉक्टरों की अनुपस्थिति से दोनों अस्पताल केवल भवन बनकर रह गए हैं। यदि जल्द नियुक्ति नहीं हुई तो पशुपालकों को छोटी-छोटी बीमारियों के इलाज के लिए भी लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी।
उत्कृष्ट चिकित्सालय भी नहीं बच पाया
प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय पिंड्राजोरा को वर्ष 2023 में कार्यों एवं सेवा के आधार पर झारखंड राज्य के पांच बेहतर पशु चिकित्सालयों में से एक के रूप में बेहतर सेवा एवं कार्यों के प्रति समर्पण के लिए प्रशस्ति पत्र मिल चुका है। ऐसे बेहतर चिकित्सालय को अचानक बंद किया जाना पशुपालकों के लिए चिंता का विषय है। बेहतर कार्यप्रणाली और सेवाओं के कारण यह अस्पताल राज्य स्तर पर पहचान बना चुका था। ऐसे प्रतिष्ठित चिकित्सालय का डॉक्टरविहीन होकर बंद हो जाना क्षेत्र के लोगों के लिए आश्चर्य और चिंता का विषय बना हुआ है।
सीमावर्ती क्षेत्र होने से बढ़ी चिंता
पिंड्राजोरा झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमा से सटा महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां प्रतिदिन दोनों राज्यों के बीच पशुओं का आवागमन होता है। पश्चिम बंगाल के बटन क्षेत्र में लगने वाले बड़े पशु हाट में खरीद-बिक्री के लिए बड़ी संख्या में पशुपालक अपने पशु लेकर पहुंचते हैं। ऐसे में पशुओं की नियमित स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण एवं उपचार के लिए सुदृढ़ पशु चिकित्सा व्यवस्था अत्यंत आवश्यक मानी जाती है। इसके बावजूद चिकित्सकों की कमी से स्थानीय पशुपालकों में गहरी नाराजगी है।
13 पंचायतों के हजारों पशुपालकों पर पड़ेगा असर
पिंड्राजोरा प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय के अंतर्गत मिर्धा, सरदाहा, कुमारदागा, गोपालपुर, पिंड्राजोरा, उलगोड़ा, काशीझरिया, टुपरा, चाकुलिया, सोनाबाद, कुरा, बारपोखर तथा नारायणपुर समेत लगभग 13 पंचायतों के पशुओं का इलाज किया जाता रहा है। इस अस्पताल पर क्षेत्र के हजारों पशुपालक निर्भर हैं।
अब चिकित्सक नहीं रहने के कारण पशुपालकों को इलाज के लिए चास स्थित मॉडल पशु चिकित्सालय जाना पड़ेगा, जिसकी दूरी कई गांवों से 15 से 20 किलोमीटर तक है। इससे पशुपालकों पर समय और आर्थिक बोझ दोनों बढ़ेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि पहले प्रतिदिन सुबह 9 बजे से शाम 3 बजे तक डॉक्टर उपलब्ध रहते थे तथा आवश्यक दवाएं भी आसानी से मिल जाती थीं। अब पशुओं के बीमार होने पर समय पर उपचार मिलना कठिन हो गया है।
आंदोलन की चेतावनी
जिला परिषद सदस्य राजेश महतो, मुखिया कृष्णा पद महतो, पंचायत समिति सदस्य किशोर कुमार, उपमुखिया राजकुमार गोप, वार्ड सदस्य सरोज कुमार तिवारी, लंबोदर महतो, पूर्व मुखिया गोरा चांद महतो, पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष बाटुल प्रमाणिक, समाजसेवी संतोष कुमार महतो, विकास महतो, चांदू महतो, आकिंचंद महतो, मुकेश, युधिष्ठिर महतो, उमेश, गणेश, सुकेश, राजेन, साधु कुमार सहित अन्य जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने दोनों पशु चिकित्सालयों में तत्काल पशु चिकित्सा पदाधिकारियों की नियुक्ति कर सेवाएं पुनः शुरू करने की मांग की है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र चिकित्सकों की तैनाती कर दोनों अस्पतालों को पुनः संचालित नहीं किया गया तो क्षेत्र के हजारों पशुपालकों के हित में सरकार एवं पशुपालन विभाग के खिलाफ उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा। उनका कहना है कि पशुपालकों की समस्याओं की अनदेखी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
झारखंड सरकार के कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के आदेश के अनुसार पिंड्राजोरा तथा सिवनडीह प्राथमिक पशु चिकित्सालय को बंद कर दिया गया है। प्रखंड स्तरीय प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी के पद को समाप्त कर दिया गया है। चास प्रखंड में जहां पहले एक डॉक्टर पदस्थापित थे, वहां अब दो डॉक्टर नियुक्त किए गए हैं।
