खनिज संशोधन विधेयक के खिलाफ जयराम महतो ने खोला मोर्चा, PM को लिखी चिट्ठी

डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर एक पत्र लिखा है. उन्होंने विधेयक के संभावित दुष्प्रभावों को देखते हुए इसे वापस लेने का आग्रह किया है.

जेएलकेएम के केंद्रीय अध्यक्ष सह डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो ने खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है. गुरुवार को भेजे गये पत्र में उन्होंने विधेयक के संभावित प्रभावों को लेकर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से इस पर पुनर्विचार करने और इसे वापस लेने का आग्रह किया है.

जयराम महतो ने पत्र में झारखंड के खनिज संसाधनों, राज्य के राजस्व अधिकार और खनन प्रभावित लोगों के हितों का मुद्दा उठाया है. उन्होंने कहा कि खनिज संपदा झारखंड की अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला है. ऐसे में खनिज संसाधनों से जुड़े नीतिगत फैसलों में राज्य के हितों और स्थानीय लोगों की चिंताओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.

राज्य की लेवी पर रोक को बताया चिंता का विषय

विधायक ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन से खनिजों और खनिज-धारित भूमि पर राज्य सरकार द्वारा लगाये जाने वाले अतिरिक्त कर, उपकर या अन्य शुल्क को लेकर राज्यों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं. उनके अनुसार खनिज की कीमत, रॉयल्टी और केंद्र द्वारा तय शर्तों के बीच राज्य के राजस्व अधिकारों का संतुलन जरूरी है.

1.36 लाख करोड़ रुपये की रॉयल्टी दावेदारी का जिक्र

जयराम महतो ने केंद्र और झारखंड सरकार के बीच लंबे समय से चले आ रहे कोयला रॉयल्टी विवाद का भी पत्र में उल्लेख किया है. उन्होंने दावा किया कि झारखंड सरकार लंबे समय से कोयले की रॉयल्टी के रूप में करीब 1.36 लाख करोड़ रुपये की दावेदारी करती रही है. उनका कहना है कि इस मुद्दे का अब तक ठोस समाधान नहीं निकल पाया है.


विधायक जयराम महतो के द्वारा प्रधानमंत्री को भेजा गया पत्र

13,800 करोड़ रुपये सेस राजस्व के लक्ष्य का उल्लेख

पत्र में झारखंड मिनरल बीयरिंग लैंड सेस रूल्स, 2024 का हवाला देते हुए जयराम महतो ने कहा कि खनिज-धारित भूमि पर लगाया जाने वाला सेस राज्य के लिए महत्वपूर्ण राजस्व स्रोत है. उन्होंने दावा किया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में सेस से करीब 13,800 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है. अप्रैल से जुलाई 2026 के दौरान करीब 4,400 करोड़ रुपये सेस के रूप में प्राप्त होने का भी उन्होंने पत्र में उल्लेख किया है.

सेस बंद हुआ तो विकास योजनाओं पर पड़ेगा असर

जेएलकेएम अध्यक्ष ने आशंका जतायी कि यदि प्रस्तावित संशोधन के बाद राज्य सरकार द्वारा वसूला जाने वाला सेस बंद होता है, तो झारखंड की वित्तीय स्थिति पर असर पड़ सकता है. इससे विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के लिए उपलब्ध संसाधनों पर दबाव बढ़ने की संभावना है.

विस्थापन और प्रदूषण का भी उठाया मुद्दा

जयराम महतो ने खनन परियोजनाओं के कारण विस्थापन, पलायन और प्रदूषण जैसी समस्याओं का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि झारखंड के रैयतों ने खनन परियोजनाओं के लिए बड़ी मात्रा में अपनी जमीन दी है. ऐसे में राज्य की खनिज संपदा से जुड़े फैसलों में स्थानीय लोगों के हितों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.

चार करोड़ लोगों के हित में विधेयक वापस लेने की मांग

पत्र के अंत में जयराम महतो ने प्रधानमंत्री से झारखंड की वित्तीय स्थिति, विकास की जरूरतों और राज्य की जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पर पुनर्विचार करने और इसे वापस लेने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि खनिज संपदा से समृद्ध झारखंड को अपने प्राकृतिक संसाधनों से प्राप्त राजस्व और सेस पर उचित अधिकार मिलना चाहिए.


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By Uday giri

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