Bokaro News : किसी को ब्लैंक चेक देने से हो सकती है परेशानी

Bokaro News : प्रभात खबर की ओर से ऑनलाइन लीगल काउंसेलिंग का आयोजन किया गया.

वित्तीय मामलों में संभल कर कार्य करना चाहिए. किसी को ब्लैंक चेक देने पर उसका गलत इस्तेमाल हुआ तो परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. ब्लैंक चेक में मनचाही राशि भर कर चेक बाउंस कराया जा सकता है. चेक में राशि भर कर ही देना चाहिए. यह बातें बोकारो न्यायालय के वरीय अधिवक्ता शाहिद परवाज साह ने कही. वे रविवार को प्रभात खबर के ऑनलाइन लीगल काउंसेलिंग में पाठकों के सवालों पर कानूनी सलाह दे रहे थे. कार्यक्रम में धनबाद, बोकारो, गिरिडीह, कोडरमा, बगोदर, सरिया सहित अन्य जगहों के पाठकों के लगातार फोन आते रहे. शाहिद परवाज ने उन्हें कानून के तहत समाधान की राह बतायी.

इन्होंने मांगी सलाह

बोकारो थर्मल के रोहन कुमार का सवाल : मेरे पिता का देहांत हो गया है. वे बीसीसीएल में कार्यरत थे. अनुकंपा के आधार पर नियोजन को लेकर हाई कोर्ट में वर्ष 2022 में केस किया. बाद में दूसरे वकील को केस नंबर देकर जानकारी ली, तो पता चला कि मेरा केस फाइल ही नहीं है. उस नंबर पर दूसरे व्यक्ति का केस दर्ज है.

अधिवक्ता की सलाह : गलतफहमी में नहीं रहे. अपने वकील से केस का अपडेट व स्टेटस की जानकारी लें. ऐसा हो सकता है कि आपने किसी कारणवश केस नंबर ही गलत समझ लिया हो. दूसरे वकील से बेहतर है कि अपने वकील से बात करें.

बोकारो के सृष्टिधर प्रसाद का सवाल : मेरी जमीन पर कुछ लोगों ने अतिक्रमण किया था. कोर्ट से केस जीत गया. इसके बाद दखल के लिए थाना गया. थाना दखल दिलाने में आनाकानी कर रहा है.

अधिवक्ता की सलाह : न्यायालय द्वारा जारी सभी कागजात के साथ आवेदन लेकर जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक से संपर्क करें. निश्चित रूप से जमीन पर दखल मिलेगा. कोडरमा के पूजन कुमार का सवाल : शादी के तीन माह बाद ही मेरी पत्नी अपने प्रेमी के साथ भाग गयी थी. थाना में आवेदन दिया गया था. पुलिस ने मेरी पत्नी को प्रेमी के साथ बरामद कर मुझे सौंप दिया था. अब छह माह बाद पत्नी ने अलग होने के लिए न्यायालय में आवेदन दिया है. मेटेंनेंस की मांग कर रही है.

अधिवक्ता की सलाह : थाना द्वारा बनाये गये कागजात के साथ आवेदन कोर्ट को अधिवक्ता के माध्यम से समर्पित करें. न्यायालय को सभी साक्ष्य उपलब्ध होने पर पत्नी द्वारा फाइल मेंटेनेंस आवेदन को रद्द कर दिया जायेगा. गिरिडीह के हरेंद्र दूबे का सवाल : सरकारी विभाग में कार्य किया था. राशि भुगतान नहीं किया गया. मांगने पर सरकारी कामकाज में बाधा पहुंचाने का केस कर दिया. फैसला मेरे हक में आया. क्या मानहानि का मुकदमा कर सकता हूं.

अधिवक्ता की सलाह : मानहानि का मुकदमा कर सकते हैं. हर्जाना को लेकर मुकदमा भी दायर कर सकते हैं. बोकारो थर्मल के संजय कुमार का सवाल : मैंने बैंक में चेक जमा किया था, लेकिन खाता में राशि जमा नहीं हुई. बैंक पूछने पर चेक के बारे में कोई जानकारी नहीं दे रहा है. क्या करूं.

अधिवक्ता की सलाह : बैंक को खाता में जमा दिखाना होगा या चेक में गड़बड़ी होने पर सूचित करना होगा. आप उपभोक्ता फोरम में मामला दर्ज करायें. न्याय मिलेगा. बोकारो के मनोज कुमार सिंह का सवाल : पुलिस घर आयी थी. बताया कि वर्ष 2009 में आप किसी का बेलर बने थे. वह व्यक्ति कोर्ट में हाजिर नहीं हो रहा है. इसलिए कोर्ट ने आपको न्यायालय में बुलाया है. याद नहीं आ रहा है कि मैं किसका बेलर बना था.

अधिवक्ता की सलाह : कोर्ट जाकर पूरी जानकारी लेना चाहिए. न्यायालय न्याय देने के लिए है. परेशान होने की जरूरत नहीं है.

बोकारो के प्रकाश मिश्रा का सवाल : परिचित को 50 हजार रुपया दिया था. बदले में उसने चेक दिया. चेक बाउंस कर गया है. पैसे मांगने पर वह टाल मटोल कर रहा है.

अधिवक्ता की सलाह : परिचित को एक नोटिस भेजें. 30 दिन के अंदर जवाब नहीं मिलने पर 15 दिन तक इंतजार करें. इसके बाद भी पैसा नहीं मिला, तो न्यायालय में केस दर्ज किया जा सकता है.

कोडरमा के बसंत खाखा का सवाल : कई साल से झोपड़ी बना कर रह रहा हूं. अब एक व्यक्ति ने रास्तों को बंद कर दिया है. क्या करें. अधिवक्ता की सलाह : एसडीओ कोर्ट में मामला दर्ज करायें. रास्ते में आपकी जमीन नहीं भी है, तो आने-जाने का रास्ता दिलाया जायेगा. गिरिडीह के ब्रजेश पाठक का सवाल : सरकारी कार्यालय में कार्यरत हूं. नौ साल से प्रोन्नति नहीं मिली है. मांग करने पर जवाब मिलता है कि सीट रिक्त नहीं है.

अधिवक्ता की सलाह : सीट खाली नहीं होने पर भी प्रोन्नति पॉलिसी के तहत लाभ देना होगा. इसके लिए हाई कोर्ट या लेंबर कोर्ट का सहारा ले सकते है. गिरिडीह के कृष्ण मुरारी पाठक का सवाल : सरकारी जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया है. ग्रामीणों ने हस्ताक्षरयुक्त आवेदन सीओ को सौंपा है. अब तक कुछ नहीं हुआ. न्याय के लिए अब आगे कहां जाना होगा.

अधिवक्ता की सलाह : सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कानूनन अपराध है. सीओ के दिलचस्पी नहीं लेने पर एलआरडीसी या डीसी को आवेदन दें. सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया जायेगा. बोकारो के प्रेम प्रकाश का सवाल : ट्रेन लेट होने की वजह से अगली ट्रेन छूट गयी. ऐसे में रेलवे से मुआवजा मिलेगा.

अधिवक्ता की सलाह : संबंधित क्षेत्र के रेलवे ट्रिब्यूनल कोर्ट में मामला दर्ज करायें. मुआवजा मिलेगा. धनबाद के विजय प्रकाश जायसवाल का सवाल : मेरे एक परिचित ने मेरा बैंक खाता का इस्तेमाल व्यवसायिक कार्य के लिए किया. इस दौरान खाते से पांच लाख का ट्रांजेक्शन किया गया. परिचित ने मुझसे पांच हजार रुपया का एक ब्लैंक चेक लिया. पैसा मांगने पर चेक बाउंस कर फंसा दिया. मैंने भी केस किया. अब क्या करें.

अधिवक्ता की सलाह : अपने अधिवक्ता को घटनाक्रम की पूरी जानकारी ले. कोर्ट के फैसले का इंतजार करें.

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