Bokaro News : संवाददाता, बोकारो. जमीन विवाद, मारपीट, घरेलू हिंसा सहित अन्य छोटे स्तर के मामले को सलटाने के लिए सामाजिक व्यवस्था का सहारा निश्चित रूप से लेना चाहिए. इससे समय की बचत के साथ-साथ अनावश्यक परेशानियों से बचा जा सकता है. छोटे मामले में सीधे पुलिस, कोर्ट कचहरी का चक्कर नहीं लगाना चाहिए. आपसी बातचीत से गंभीर से गंभीर मामले तक सुलझाये जा सकते हैं. अधिवक्ताओं की व्यक्तिगत राय व आपसी सहमति के साथ कई मामलों को कोर्ट के बाहर सुलझा सकते हैं. ये बातें रविवार को प्रभात खबर ऑनलाइन लीगल काउंसेलिंग में बोकारो सिविल कोर्ट के वरीय अधिवक्ता संजीत कुमार सिंह ने कही. प्रभात खबर लीगल काउंसलिंग में धनबाद, बोकारो, बेरमो, गिरिडीह, कोडरमा, बगोदर सहित अन्य जगहों के पाठकों के लगातार फोन आते रहे. श्री सिंह ने सभी के सवालों के जवाब दिये. उन्हें कानून के तहत समाधान भी सुझाया. चास के संजीव सिंह का सवाल : वह फौज में थे. जब घर लौटे, तो जमीन बंटवारे को लेकर छोटे भाई व उनकी पत्नी से विवाद हो गया. उन्हें कई तरह के मामले में फंसा दिया गया. छेड़खानी तक का आरोप लगाया गया है. थाना सीसीटीवी एवीडेंस को नहीं मान रहा है. कोई कार्रवाई नहीं हो रही है? अधिवक्ता की सलाह : मामले को लेकर पुलिस के वरीय अधिकारियों (एसपी, डीआइजी, आइजी, डीजीपी) से मिले. मामला नहीं सलटता है, तो अधिवक्ता के माध्यम से कानून का सहारा लें. बगोदर से सुदामा कुमार का सवाल : मेरे पिता घर में हमेशा मारपीट करते रहते हैं. मेरी माताजी के साथ दुर्व्यवहार करने लगते हैं. क्या किया जा सकता है? अधिवक्ता का सवाल : पिता को सामाजिक प्रतिष्ठा के बारे में समझायें. उनकी भावनाओं को समझें. हो सके तो पड़ोसियों या समाज के अन्य प्रतिष्ठित व्यक्ति का सहारा लें. बदलाव निश्चित रूप से आयेगा. चीरा चास के संजय मुखर्जी का सवाल : चीरा चास में अपार्टमेंट लिया था. एग्रीमेंट के तहत पार्किंग देना था, परंतु परेशान किया जा रहा है. पार्किंग की व्यवस्था कैसे मिलेगी? अधिवक्ता की सलाह : आप रेरा (रियल इस्टेट रेग्युलेशन अरिटीज) में आवेदन देकर समस्या रख सकते हैं. आपके समस्या का समाधान त्वरित गति से होगा. गिरिडीह से सुधीर महतो का सवाल : हमारे माता-पिता गांव में रहते हैं. हम दो भाई हैं. दोनों को चाचा अपने पास रख कर पढ़ा रहे हैं. चाचा को कोई संतान नहीं है. चाची बोलती है कि छोटे भाई के नाम संपत्ति कर देंगी. यदि ऐसा हो गया, तो मुझे संपत्ति में हिस्सा मिल पायेगा? अधिवक्ता का सवाल : चाचा अपनी संतान मान कर आप दोनों भाई को पढ़ा है. पहले पूरी शिक्षा हासिल कर लें. ऐसा नहीं है कि चाची का आपके प्रति स्नेह नहीं होगा. मन से वहम निकाल दें. मन से पढ़ाई करें. कोडरमा से विनिता कुमारी का सवाल : मेरी शादी के 12 साल हो गये. पति शराब पीकर मारपीट करता है. घर चलाने के लिए मैं प्राइवेट काम करती हूं. बच्चों के भविष्य पर भी असर पड़ रहा है. क्या करूं? अधिवक्ता की सलाह : मायके व ससुराल पक्ष को एकत्रित कर एक बार पति पर दबाव बनायें. इसके बाद भी बाज नहीं आता है, तो एक्शन लें. थाना को सारी बात बता कर सहयोग मांगें. लीगल नोटिस भिजवायें. धनबाद के विवेक कुमार का सवाल : मैंने 10वीं तक की शिक्षा हासिल की है. आगे की पढ़ाई करना चाहता हूं. आर्थिक रूप से सबल नहीं हूं. क्या करना होगा? अधिवक्ता की सलाह : जिला कल्याण पदाधिकारी से संपर्क कोंगा. प्रधानमंत्री स्कीम मेरिट के तहत छात्रवृत्ति का प्रावधान केंद्र व राज्य स्तर पर है. इसका लाभ लिया जा सकता है. सिंदरी के साजन सिंह का सवाल : हमारी जमीन पर पड़ोसियों ने दावा कर रखा है. कागज दिखा रहे हैं कि हमारे घर के अभिभावक ने जमीन उन्हें लिख दिया है. मुझे कोई कागजात नहीं मिल रहा है? अधिवक्ता की सलाह : न्यायालय से डीड की सर्टिफाइड कॉपी निकाल लें. सभी कागजात को दुरूस्त कर आगे की प्रक्रिया में लगे. उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई हो सकती है. बेरमो के सरयू सिंह का सवाल : मेरे पिता दो भाई हैं. चाचा का कोई संतान नहीं है. गोतिया लोग जमीन पर कब्जा कर रहे हैं. ऐसे में क्या करना होगा? अधिवक्ता की सलाह : टाइटल पार्टिशन शूट चास कोर्ट में दाखिल करना होगा. इसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी. जमीन आपके हक में मिल जायेगा. गिरिडीह के प्रकाश पाठक का सवाल : सरकारी जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया है. ग्रामीणों ने हस्ताक्षरयुक्त आवेदन सीओ को सौंपा है. न्याय के लिए अब आगे कहां जाना होगा? अधिवक्ता की सलाह : सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करना कानूनन अपराध है. सीओ के दिलचस्पी नहीं लेने पर एलआरडीसी या डीसी को आवेदन सौंप करें. झारखंड इनक्रोचमेंट अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी. गिरिडीह बासकीनाथ के सवाल : मेरे ससुर की संपत्ति में मेरी पत्नी को कैसे हिस्सा मिलेगा. इसके लिए क्या करना होगा. कौन सा कानूनी रास्ता है? अधिवक्ता की सलाह : आपके ससुर को वसीयत बनानी होगी, जिसमें आपकी पत्नी का नाम होगा. वसीयत रजिस्ट्री कार्यालय में रजिस्ट्रार के सामने बनाया जा सकता है.
Bokaro News : छोटे स्तर के मामले के निदान के लिए सामाजिक व्यवस्था का लें सहारा : अधिवक्ता संजीत
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