बोकारो से राकेश वर्मा की रिपोर्ट
Bokaro News: झारखंड के डीवीसी बोकारो थर्मल पावर प्लांट में रविवार की सुबह उस वक्त अफरा-तफरी और दहशत फैल गई, जब कोयले से खाली हुई एक रैक (मालगाड़ी) प्लांट से बाहर निकल आई. सुबह लगभग साढ़े सात बजे हुई इस खौफनाक घटना में बेकाबू रैक प्लांट के भारी-भरकम कोल गेट को तिनके की तरह तोड़ते हुए बाहर निकली और ट्रैक के पास खड़ी एक स्कॉर्पियो को अपनी चपेट में ले लिया.
स्कॉर्पियो को 500 मीटर तक घसीटा
टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि रैक स्कॉर्पियो को करीब पांच सौ मीटर तक घसीटते हुए ले गई. इस दौरान स्कॉर्पियो के चालक सह मालिक कथारा निवासी अमरदीप ने मौत को सामने देख वाहन से छलांग लगा दी, जिससे उनकी जान बाल-बाल बची.
लापरवाही सामने आ रही
घटना के पीछे रेलवे और रैक प्रबंधन की घोर लापरवाही सामने आ रही है. बताया जाता है कि सुबह साढ़े चार बजे कोयला लदा रैक प्लांट के भीतर गया था, जिसे सात बजे तक खाली कर लिया गया. नियम के अनुसार, जब खाली रैक बाहर निकलता है, तो इंजन आगे की दिशा में होना चाहिए, लेकिन रविवार को रैक को पीछे की ओर से (रिवर्स) बाहर निकाला जा रहा था. हैरत की बात यह है कि इस दौरान पीछे न तो गार्ड की बोगी थी और न ही कोई सिग्नल. रफ्तार इतनी तेज थी कि कोल गेट को ध्वस्त करने के बाद पांच सौ मीटर दूर जाकर रैक का पिछला हिस्सा बेपटरी हो गया, जिसके बाद ही पहिए थमे. गनीमत रही कि गोमो-चोपन पैसेंजर के आने के कारण मेन लाइन का रेलवे गेट बंद था, वरना यह बेकाबू रैक किसी बड़े यात्री ट्रेन हादसे का सबब बन सकती थी.
मौके पर पहुंची टीम
घटना की सूचना मिलते ही सीआईएसएफ निरीक्षक प्रशांत कुमार प्रसून, थाना प्रभारी पिंकू कुमार यादव और स्टेशन मैनेजर शैलेश कुमार ने दल-बल के साथ मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया. रैक चालक अरुण कुमार की भूमिका और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं.
शिकायत दर्ज, कार्रवाई की मांग
पीड़ित वाहन मालिक ने स्थानीय थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराकर कार्रवाई की मांग की है. इसके बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है. घटना के बाद स्थानीय लोगों और डीवीसी कामगारों का कहना था कि आज डीवीसी के ओवरब्रिज का उद्घाटन हो गया रहता तो इस तरह की दुर्घटना नहीं घटती.
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