वैशाली के महुआ एसडीपीओ पर गिरेगी गाज, डीआइजी ने की विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा

वैशाली जिले के महुआ अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी संजीव कुमार पर विभागीय कार्रवाई की तलवार लटक गई है. डीआईजी ने कर्तव्यहीनता और लापरवाही के गंभीर आरोपों में उनके खिलाफ पुलिस मुख्यालय को कार्रवाई की अनुशंसा की है. 7 महीने में मात्र 17 कांडों का निष्पादन और नक्सली मामलों की उपेक्षा जैसे गंभीर मुद्दे सामने आए हैं.

Vaishali Police Departmental Action: वैशाली जिला के महुआ अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) संजीव कुमार पर विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की गयी है. तिरहुत रेंज के डीआइजी चंदन कुमार कुशवाहा ने कर्तव्यहीनता, लापरवाही और सरकारी नीतियों के उल्लंघन के गंभीर आरोपों में उनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई के लिए पुलिस मुख्यालय को प्रतिवेदन भेजा है. वैशाली एसपी की रिपोर्ट और मंतव्य के आधार पर डीआइजी ने विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की है.

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लापरवाही की खुली पोल, 7 महीने में मात्र 17 कांडों का हुआ निष्पादन

जानकारी के अनुसार, डीआइजी द्वारा तिरहुत क्षेत्र के सभी एसडीपीओ के कार्यों, शस्त्र अधिनियम और एनडीपीएस एक्ट के लंबित मामलों की समीक्षा की जा रही थी. इस दौरान महुआ एसडीपीओ की भारी लापरवाही सामने आई. जब वैशाली एसपी के माध्यम से उनसे 13 बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा गया, तो जो रिपोर्ट सामने आई वह चौंकाने वाली थी. संजीव कुमार के योगदान के समय कुल 2249 कांड लंबित थे, लेकिन 7 महीने के कार्यकाल के बाद भी फरवरी 2026 के अंत तक 2146 कांड लंबित ही रहे. इस दौरान उन्होंने अतिरिक्त रूप से मात्र 17 विशेष प्रतिवेदित कांडों का ही निष्पादन कराया.

नक्सली मामलों पर नहीं की समीक्षा, डायरी भी रही खाली

समीक्षा में पाया गया कि महुआ एसडीपीओ को पूर्व में मिले पांच कांडों के अग्रिम अनुसंधान का प्रभार मिला था, लेकिन सात महीनों में उन्होंने एक भी केस डायरी समर्पित नहीं की. इतना ही नहीं, उनके क्षेत्र में वर्ष 2012 से 2018 के बीच के नक्सली घटनाओं से जुड़े चार मामले लंबित हैं, जिनकी उन्होंने सात महीने में एक बार भी समीक्षा नहीं की.

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शराब माफिया को स्थानीय पुलिस का संरक्षण, एसडीपीओ रहे मौन

रिपोर्ट में मद्यनिषेध कानून को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं. शराबबंदी कानून की सफलता को लेकर महुआ एसडीपीओ द्वारा कोई सार्थक प्रयास नहीं किया गया. सबसे गंभीर आरोप यह है कि कई कांडों में वांछित शराब माफिया प्रभात सिंह घर पर रहकर स्थानीय प्रशासन और जन्दाहा थानाध्यक्ष के संरक्षण में अवैध शराब का कारोबार कर रहा था, लेकिन एसडीपीओ ने उसकी गिरफ्तारी के लिए कोई प्रयास नहीं किया.

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विभागीय बैठकों से गायब और वारंट पंजी भी मिली खराब

वैशाली एसपी की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025-26 में महुआ एसडीपीओ ने मात्र तीन प्रतिष्ठानों की निरीक्षण टिप्पणी भेजी. जुलाई 2025 से जनवरी 2026 के बीच उन्होंने एक भी विभागीय जांच पूरी नहीं की और एसपी द्वारा बुलाई गई सामूहिक बैठकों से भी गायब रहे. उनके क्षेत्र में वारंट, इश्तेहार और कुर्की पंजी की स्थिति भी अत्यंत खराब और त्रुटिपूर्ण पाई गई है. कई मामलों में उन्होंने 15 दिनों की देरी से या फिर बेहद त्रुटिपूर्ण पर्यवेक्षण टिप्पणी समर्पित की. वैशाली एसपी ने रिपोर्ट में साफ कहा है कि एसडीपीओ का अपने अधीनस्थों पर कोई नियंत्रण नहीं है, जिससे अपराध नियंत्रण और सरकारी नीतियों का पालन कराना चुनौतीपूर्ण हो गया है. इसके बाद डीआइजी ने कार्रवाई की अनुशंसा मुख्यालय भेज दी है.


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Published by: Sumit Kumar

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