विश्व रक्तदान दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम का किया गया आयोजन

एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी प्रो विद्यानंद यादव द्वारा महाविद्यालय परिसर एवं चयनित ग्राम नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड नंबर 20 स्थित दलित टोला में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

त्रिवेणीगंज मुख्यालय स्थित रविवार को राष्ट्रीय सेवा योजना व रेड रिबन क्लब अनूपलाल यादव महाविद्यालय त्रिवेणीगंज एवं रेड क्रॉस सोसाइटी के संयुक्त तत्वाधान में विश्व रक्तदान दिवस के अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ हेमंत कुमार की अध्यक्षता में एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी प्रो विद्यानंद यादव द्वारा महाविद्यालय परिसर एवं चयनित ग्राम नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड नंबर 20 स्थित दलित टोला में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के तहत प्राचार्य ने बताए कि “मानव सेवा ही परम धर्म है. दान से बढ़कर कोई पुण्य नहीं है, मानव रक्षा के लिए स्वयंसेवकों को रक्त दान के लिए आगे आना चाहिए. साथ ही स्वस्थ व्यक्ति को ही रक्त दान के लिए प्रेरित करना चाहिए.रक्त मनुष्य के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण तत्व है क्योंकि यह शरीर के ऊतकों और अंगों के लिए पोषण प्रदान करता है. समाज में महान परिवर्तन लाने, जीवन रक्षक उपायों का अनुसरण करने, दुर्घटना और चोट के साथ ही सड़क यातायात दुर्घटना में मनुष्य के रक्षा के लिए पूर्व से ही रक्त अधिकोष में रक्त जमा करने हेतु और विकसित राष्ट्र निर्माण में सहयोग करने हेतु रक्त दान आवश्यक है. कार्यक्रम पदाधिकारी प्रो विद्यानंद यादव ने बताया कि रक्त दान सबसे बड़ा दान है, जिसे हम महादान की भी संज्ञा देते हैं. डब्ल्यूएचओ द्वारा रक्तदान की महत्ता पर विचार करते हुए रक्त दान को प्रोत्साहन देने एवं उनसे जुड़ी भ्रांतियां दूर करने हेतु सर्वप्रथम 2004 ईस्वी 14 जून को विश्व रक्तदान दिवस मनाया गया. तब से प्रत्येक वर्ष 14 जून को हम विश्व रक्त दान दिवस मनाते आ रहे हैं. 14 जून को विश्व रक्तदान दिवस मनाने का कारण यह है कि शरीर विज्ञान के महान वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टाईन का जन्म 14 जून 1868 को हुआ था. उन्होंने मानव रक्त में उपस्थित एग्ल्यु टिनिन की मौजूदगी के आधार पर रक्तकणों का ए, बी और ओ समूह में वर्गीकरण किया. इस वर्गीकरण ने चिकित्सा विज्ञान में महत्वपूर्ण योगदान दिया. इस महत्वपूर्ण खोज के लिए उन्हें 1930 में नोबेल पुरस्कार दिया गया. विश्व रक्त दान दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य जीवन रक्षा हेतु रक्त की आवश्यकता और महत्व को बताने के लिए जागरूकता फैलाना है. रक्तदान करने से दाता को किसी प्रकार की क्षति नहीं होती है और उन्हें कई प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलती है और बहुत जल्द ही रक्त कण का नवीनीकरण होकर स्वास्थ्य लाभ मिलता है. रक्त दान करने वालों का शरीर का तापमान सामान्य और नाड़ी की गति 60 से 100 के मध्य का होना चाहिए, साथ ही उम्र 18 वर्ष से 60 वर्ष के बीच का होना चाहिए. वजन 45 किग्रा से अधिक होना चाहिए, साथ ही एक्त दाता को एड्स उपदंश हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, मलेरिया आदि रोगों से मुक्त होना चाहिए. राष्ट्रहित में स्वयंसेवकों को स्वयं के साथ अन्य लोगों को भी रक्त दान के लिए प्रेरित करना चाहिए. कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्रो.अरुण कुमार,डॉ अरविंद कुमार,तृतीय इकाई के कार्यक्रम पदाधिकारी प्रोफ़ेसर शंभू यादव, द्वितीय इकाई के कार्यक्रम पदाधिकारी प्रो. कुमारी पूनम तथा अन्य एवं शिक्षकेतर कर्मचारी गण गगन कुमार, दिग्दर्शन, चिरंजीव, रंजन तथा अन्य एवं एनएसएस के स्वयंसेवक आस्था कुमारी, सिमरन गोयल, अनुष्का कुमारी, बबली कुमारी, मिनटी कुमारी, दीपिका कुमारी, साक्षी कुमारी, सरिता कुमारी, अनुप्रिया कुमारी, जिया सिंह, प्रिया भारती, सौम्या कुमारी, मौसम कुमारी, दिव्या कुमारी तथा अन्य उपस्थित थे.

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