सुपौल ग्रीष्मावकाश के दौरान आयोजित सेवाकालीन प्रशिक्षण को लेकर शिक्षकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है. बड़ी संख्या में शिक्षकों ने मुख्यमंत्री और शिक्षामंत्री से 01 जून से शुरू हुए प्रशिक्षण कार्यक्रम को तत्काल स्थगित करने की मांग की है. शिक्षकों का कहना है कि शिक्षा विभाग ने 1 जून से 20 जून तक ग्रीष्मावकाश घोषित किया है. छुट्टियों को ध्यान में रखते हुए कई शिक्षकों ने महीनों पहले इलाज कराने अथवा परिवार के साथ समय बिताने के लिए रेल टिकट और अन्य व्यवस्थाएं कर ली थीं. लेकिन अब प्रशिक्षण में अनिवार्य रूप से शामिल होने के निर्देश के कारण उनकी योजनाएं प्रभावित हो गई हैं. कई शिक्षकों ने बताया कि लंबे समय बाद मिले अवकाश में वे स्वास्थ्य संबंधी कार्यों के लिए बाहर जाने वाले थे. जबकि कुछ ने परिवार के साथ समय बिताने की योजना बनाई थी. प्रशिक्षण के कारण अब यह संभव नहीं हो पा रहा है.
प्रशिक्षण कार्यक्रम को स्थगित करने की मांग
शिक्षकों ने सरकार से मानवीय पहलू पर विचार करते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रम को स्थगित करने की मांग की है. इधर, शिक्षा विभाग ने उन शिक्षकों को एक और अवसर प्रदान किया है जो विभिन्न कारणों से निर्धारित सेवाकालीन प्रशिक्षण में शामिल नहीं हो सके थे. राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने ऐसे शिक्षकों को 1 जून से पुनः प्रशिक्षण में शामिल होने का निर्देश दिया है. निदेशक सज्जन आर द्वारा जारी पत्र के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान कुछ शिक्षक प्रशिक्षण से वंचित रह गए थे. इनमें विधानसभा चुनाव के दौरान विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्य में प्रतिनियुक्त शिक्षक, स्वास्थ्य कारणों से अनुपस्थित शिक्षक, जनगणना कार्य में लगे शिक्षक तथा अन्य कारणों से प्रशिक्षण में भाग नहीं ले पाने वाले शिक्षक शामिल हैं. शिक्षकों का कहना है कि प्रशिक्षण आवश्यक है, लेकिन इसे ग्रीष्मावकाश के दौरान आयोजित करने से उनकी व्यक्तिगत और पारिवारिक योजनाओं पर प्रतिकुल प्रभाव पड़ रहा है. इसलिए प्रशिक्षण को अवकाश समाप्त होने के बाद आयोजित किया जाना चाहिए.
