Supaul News: सुपौल जिले में अब ग्रामीण विकास और पंचायत स्तर की समस्याओं के समाधान के लिए एक नई व्यवस्था लागू की जा रही है. हर महीने के अंतिम रविवार को ‘पंचायत विकास दिवस’ आयोजित किया जाएगा, जहां ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ी समस्याओं, विकास योजनाओं और स्थानीय मांगों को प्राथमिकता के आधार पर सुना और समयबद्ध तरीके से निपटाया जाएगा. इसी व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए समाहरणालय स्थित लहटन चौधरी सभागार में जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया.
जिलाधिकारी सावन कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल अधिकारियों को तकनीकी जानकारी देना नहीं था, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी था कि पंचायत स्तर पर प्राप्त शिकायतें और विकास संबंधी मांगें विभागों के बीच लंबित न रहें. प्रशासन का मानना है कि यदि पंचायत स्तर पर योजनाओं की निगरानी और समस्याओं का त्वरित समाधान होगा, तो ग्रामीण विकास की गति तेज होगी और लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिलेगा.
पंचायत विकास दिवस क्या है और क्यों है महत्वपूर्ण
प्रशिक्षण कार्यक्रम में अधिकारियों को बताया गया कि पंचायत विकास दिवस के दौरान प्राप्त सभी मांग-पत्रों और आवेदनों का समयबद्ध निष्पादन किया जाएगा.
इस व्यवस्था का उद्देश्य पंचायतों को विकास योजनाओं की योजना-निर्माण प्रक्रिया से अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ना और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है. इससे गांवों की सड़क, पेयजल, स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं पर तेजी से कार्रवाई संभव हो सकेगी.
जिला स्तरीय प्रशिक्षण में कई विभागों की भागीदारी
कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त इंद्रवीर कुमार, जिला पंचायत राज पदाधिकारी, वरीय उप समाहर्ता तथा विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे.
प्रशिक्षण के दौरान जिला पंचायत कार्यालय के जिला प्रोग्रामर और समाहरणालय के आईटी मैनेजर ने अधिकारियों को यह समझाया कि पंचायत विकास दिवस के तहत प्राप्त आवेदनों को किस प्रकार विभागीय पोर्टल पर दर्ज कर समयबद्ध तरीके से निपटाया जाएगा.
अधिकारियों को मिला यूजर आईडी और पासवर्ड
प्रशिक्षण के बाद संबंधित विभागों को जिला स्तरीय यूजर आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराया गया.
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को पंचायत विकास दिवस के दौरान प्राप्त आवेदनों का विभागीय पोर्टल पर समय पर पंजीकरण और निष्पादन हो सके. प्रशासन ने स्पष्ट किया कि डिजिटल प्रणाली के माध्यम से निगरानी और जवाबदेही दोनों मजबूत की जाएंगी.
जीपीडीपी, बीपीडीपी और डीपीडीपी पर विशेष प्रशिक्षण
कार्यक्रम में जिला पंचायत संसाधन केंद्र के नोडल पदाधिकारी ने पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी, बीपीडीपी और डीपीडीपी) तथा 16वें वित्त आयोग से संबंधित प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी.
अधिकारियों को यह भी बताया गया कि पंचायतों की विकास प्राथमिकताओं का निर्धारण कैसे किया जाए, उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कैसे हो और योजनाओं के क्रियान्वयन में स्थानीय भागीदारी कैसे बढ़ाई जाए.
Supaul News: डीएम ने दिए प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश
जिलाधिकारी सावन कुमार ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि पंचायत विकास दिवस के माध्यम से प्राप्त जनसमस्याओं और विकास संबंधी मांगों का प्राथमिकता के आधार पर निष्पादन सुनिश्चित करें.
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाओं का लाभ समय पर आम लोगों तक पहुंचना चाहिए और किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए. उन्होंने विभागीय समन्वय, नियमित मॉनिटरिंग और जवाबदेही पर विशेष जोर दिया.
ग्रामीण विकास को मिलेगी नई गति
प्रशासन का मानना है कि पंचायत विकास दिवस की नियमित व्यवस्था से गांवों की छोटी-बड़ी समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी.
यदि विभाग समयबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हैं, तो पंचायत स्तर पर विकास योजनाओं की गुणवत्ता, पारदर्शिता और प्रभावशीलता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है. इससे ग्रामीण जनता और प्रशासन के बीच संवाद भी मजबूत होगा.
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