– मोहनपुर में दो दिवसीय जलसा का समापन, बड़ी संख्या में अकीदतमंद हुए शामिल
छातापुर.
प्रखंड के कटहरा पंचायत स्थित मदरसा इसलाहूल मुस्लेमिन मोहनपुर में आयोजित दो दिवसीय जलसा का समापन गुरुवार को दुआ के साथ हो गया. बुधवार देर रात अमीर-ए-शरियत हजरत मौलाना अहमद वली रहमानी के साथ अकीदतमंदों ने दुआ की. वहीं गुरुवार पूर्वाह्न जामिया रहमानी खानकाह मुंगेर के उस्ताज मौलाना जमील अहमद मोजाहिरी के साथ सैकड़ों लोग दुआ में शरीक हुए.इसलाहे मुआशरा व तालिमी बेदारी विषयक दो दिवसीय जलसे की अध्यक्षता अमीर-ए-शरियत हजरत रहमानी ने की. जबकि संचालन मौलाना मुमताज रहमानी एवं मौलाना जियाउल्लाह रहमानी ने किया. 33 वर्ष बाद किसी अमीर-ए-शरियत के इलाके में आगमन से मुस्लिम समुदाय में खासा उत्साह देखने को मिला. भीषण गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुटी रही.
अरबी जुबान को बताया कुरआन समझने की कुंजी
अपने संबोधन में अमीर-ए-शरियत ने धर्मावलंबियों से अरबी, कुरआन और सीरत पर अमल करने की अपील की. उन्होंने कहा कि मुसलमानों के लिए अरबी, कुरआन और सीरत बुनियादी अहमियत रखते हैं. सभी विषयों की पढ़ाई के साथ अरबी भाषा सीखना भी जरूरी है. उन्होंने कहा कि अल्लाह के कलाम को समझने और उससे हिदायत हासिल करने के लिए अरबी सीखना निहायत जरूरी है.
उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति अरबी सीख सकता है और सीखने की कोई उम्र नहीं होती. जामिया रहमानी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि कम उम्र के बच्चे भी वहां अरबी में बातचीत करते हैं. साथ ही उन्होंने कुरआन की शिक्षा हासिल करने और जीवनभर इल्म प्राप्त करने की कोशिश जारी रखने की नसीहत दी.अमीर-ए-शरियत ने नबी से मुहब्बत, आपसी भाईचारा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने का संदेश दिया. उन्होंने कहा कि बच्चों को मुकम्मल तालीम दिलाना हर माता-पिता का पहला फर्ज है. अन्य मौलानाओं ने भी इंसानियत, तालीम और इल्म के महत्व पर प्रकाश डाला. जलसा के दौरान शेरो-शायरी का दौर भी चलता रहा.मौके पर मधुबनी मदरसा के मौलाना मुफ्ती अंसार कासमी, मुखिया साबिर कौसर, मुखिया प्रतिनिधि मो. हासिम, सरपंच मो. जाहिद, हाफिज इफ्तखार, हाफिज आलमगीर, कारी नदीम, कारी शकील, मो. नाजिम, मो. वसी, हाफिज शोएब सहित बड़ी संख्या में मौलाना, हाफिज और गणमान्य लोग उपस्थित थे.
