Supaul News: भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा को अक्सर लोग केवल नक्शे पर बनी एक रेखा के रूप में देखते हैं, लेकिन उस सीमा की सुरक्षा कैसे होती है, वहां कौन-कौन सी एजेंसियां काम करती हैं और हर दिन सीमा पार आने-जाने वालों की जांच किस तरह होती है, यह अनुभव 04 बिहार गर्ल्स बटालियन, राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी), सहरसा की 27 गर्ल्स कैडेट्स को सुपौल जिले के भीमनगर चेक पोस्ट पर मिला. 45वीं वाहिनी, सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) वीरपुर की ओर से आयोजित इस शैक्षणिक भ्रमण में कैडेट्स को सीमा सुरक्षा व्यवस्था का लाइव प्रदर्शन दिखाया गया और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी गई.
सीमा सुरक्षा व्यवस्था को करीब से समझने का अवसर
भीमनगर चेक पोस्ट पर पहुंचने के बाद एनसीसी कैडेट्स को भारत-नेपाल सीमा पर संचालित ट्रेड ट्रांजिट रूट के बारे में विस्तार से बताया गया. उन्हें समझाया गया कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि व्यापार, आवागमन और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय भी बेहद महत्वपूर्ण होता है.
एसएसबी अधिकारियों ने कैडेट्स को यह भी बताया कि सीमा क्षेत्र में तैनात विभिन्न सुरक्षा एवं समन्वय एजेंसियां किस प्रकार मिलकर काम करती हैं और उनकी जिम्मेदारियां किस तरह एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं.
एसएसबी ने दिखाया आधुनिक सुरक्षा तंत्र
45वीं वाहिनी के सहायक कमांडेंट जितेन्द्र कुमार ने सशस्त्र सीमा बल की जिम्मेदारियों, सीमा प्रबंधन और राष्ट्रीय सुरक्षा में एसएसबी की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी.
कैडेट्स को चेक पोस्ट पर स्थापित एक्स-रे बैगेज स्कैनर सहित अन्य आधुनिक सुरक्षा उपकरणों के संचालन का व्यावहारिक प्रदर्शन भी कराया गया. उन्हें बताया गया कि सीमा पर आने-जाने वाले सामान और यात्रियों की जांच किस प्रकार की जाती है और सुरक्षा मानकों का पालन कैसे सुनिश्चित किया जाता है.
इस दौरान कैडेट्स ने सुरक्षा उपकरणों को कार्य करते हुए देखा और अधिकारियों से सीधे सवाल पूछकर कई व्यावहारिक जानकारियां भी हासिल कीं.
राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और नेतृत्व का संदेश
भ्रमण के दौरान केवल तकनीकी जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि कैडेट्स को राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रसेवा की भावना को अपने जीवन में अपनाने के लिए भी प्रेरित किया गया.
अधिकारियों ने बताया कि एनसीसी प्रशिक्षण युवाओं को केवल शारीरिक रूप से मजबूत नहीं बनाता, बल्कि उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में भी तैयार करता है. साथ ही सुरक्षा बलों में उपलब्ध विभिन्न कैरियर अवसरों की जानकारी देते हुए छात्राओं को भविष्य में देशसेवा के लिए प्रेरित किया गया.
सीमा क्षेत्रों के लिए ऐसे कार्यक्रम क्यों हैं महत्वपूर्ण
सुपौल और वीरपुर जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में ऐसे शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम विशेष महत्व रखते हैं. इससे स्थानीय और आसपास के जिलों के विद्यार्थियों को सीमा सुरक्षा व्यवस्था के प्रति जागरूकता मिलती है और सुरक्षा बलों के कार्यों को लेकर बेहतर समझ विकसित होती है.
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के कार्यक्रम युवाओं में राष्ट्रीय चेतना, जिम्मेदारी और सार्वजनिक संस्थाओं के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करते हैं. साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और सुरक्षा एजेंसियों के बीच विश्वास का संबंध भी मजबूत होता है.
Supaul News: अनुशासित और ज्ञानवर्धक माहौल में संपन्न हुआ कार्यक्रम
कार्यक्रम के दौरान 04 बिहार गर्ल्स एनसीसी बटालियन, सहरसा के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल वी रवि शंकर, एसएसबी के अधिकारी, 03 जेसीओ, 04 एनसीओ, 02 जीसीआई और 27 गर्ल्स कैडेट्स उपस्थित रहे.
पूरा कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण, अनुशासित और ज्ञानवर्धक वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ. कैडेट्स ने इस भ्रमण को अपने प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण अनुभव बताया और कहा कि इससे उन्हें सीमा सुरक्षा व्यवस्था को वास्तविक रूप में समझने का अवसर मिला.
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