सीवान: भाई के इंतजार में दोपहर तक निर्जला रहीं बहनें, कलाई पर रक्षा सूत्र बांध मांगी लंबी उम्र की दुआ; सेल्फी और पकवानों से सजा पर्व

सीवान में रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास के साथ धूमधाम से मनाया गया. बहनों ने भाइयों की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करते हुए राखी बांधी. इस दौरान सेल्फी, पारंपरिक पकवानों और पर्यावरण संरक्षण के संदेशों ने पर्व की छटा बिखेरी.

Siwan News: भाई-बहन के अटूट प्रेम, असीम विश्वास और समर्पण का महापर्व रक्षाबंधन शुक्रवार को सीवान शहर सहित पूरे जिले में अपार उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया. सावन पूर्णिमा के पावन अवसर पर सुबह से ही घर-घर में उत्सव का माहौल देखा गया. बहनों ने विधि-विधान से पूजा की थाली सजाकर भाइयों की आरती उतारी, माथे पर रोली-चंदन का तिलक लगाया और कलाई पर स्नेह की डोर बांधी.

कई बहनें दूर से आने वाले भाइयों के इंतजार में दोपहर तक उपवास पर रहीं और कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने के उपरांत ही अन्न-जल ग्रहण किया. इस दौरान घरों में पारंपरिक मंगलगीतों और 'बहना ने भाई की कलाई पे प्यार बांधा है' जैसे लोकप्रिय गीतों से माहौल भावुक और आनंदमय बना रहा.

सेल्फी का दिखा जबर्दस्त क्रेज, वीडियो कॉल से जुड़े दूर बैठे भाई

राखी बांधने की रस्म पूरी होते ही युवाओं में सेल्फी और पारिवारिक तस्वीरें लेने की होड़ मची रही. यादगार पलों को तुरंत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर साझा किया गया. वहीं, जो भाई-बहन दूरदराज के शहरों में होने के कारण घर नहीं पहुंच सके, उन्होंने वीडियो कॉल और डिजिटल माध्यमों से जुड़कर पर्व की खुशियां बांटीं.

भाइयों को राखी बांधती बहने | Prabhat Khabar Network

मिठाई दुकानों पर भारी भीड़, बच्चों को भाई डोरेमोन-छोटा भीम वाली राखियां

शहर के प्रमुख बाजारों और मिठाई की दुकानों पर सुबह से ही ग्राहकों का तांता लगा रहा. हालांकि, कई ग्राहकों ने पिछले साल की तुलना में मिठाइयों की कीमतों में तेजी की बात भी कही. नन्हे-मुन्ने बच्चों में पर्व को लेकर अलग ही उत्साह दिखा. छोटे भाइयों की कलाई पर डोरेमोन, छोटा भीम और स्पाइडर-मैन जैसे पसंदीदा कार्टून कैरेक्टर वाली राखियां खूब सजीं.

मंदिरों में दर्शन-पूजन, खीर-मालपुआ के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश

रक्षाबंधन के मौके पर शहर के कचहरी दुर्गा मंदिर, राधा-कृष्ण मंदिर और बुढ़िया माई मंदिर में श्रद्धालुओं ने दर्शन कर परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना की. उपवास के बाद घरों में खीर, पूरी और मालपुआ जैसे पारंपरिक पकवानों का आनंद लिया गया.

इसके अलावा, विभिन्न सामाजिक संस्थाओं द्वारा वृक्षों को रक्षा सूत्र बांधकर पर्यावरण संरक्षण और हरियाली की रक्षा का संकल्प लिया गया. भगवत कथा वाचक महर्षि रामशंकर नाथ दास जी महाराज ने कहा कि रक्षा सूत्र केवल धागा नहीं, बल्कि परस्पर विश्वास, भावनात्मक सुरक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्व का सबसे बड़ा प्रतीक है.

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By पंकज कुमार

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