सीवान में कालाजार के खिलाफ तेज हुआ अभियान, केंद्रीय टीम ने सैंड फ्लाई की सघनता का किया वैज्ञानिक आकलन

सीवान के कालाजार प्रभावित गांवों में केंद्रीय टीम ने बालू मक्खी की सघनता का वैज्ञानिक सर्वे किया। इससे बीमारी नियंत्रण की रणनीति तैयार करने में मदद मिलेगी।

Siwan News : कालाजार के खिलाफ चल रहे नियंत्रण अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए केंद्रीय टीम ने जिले के कालाजार प्रभावित गांवों का दौरा किया. टीम ने बीमारी के प्रमुख वाहक बालू मक्खी (सैंड फ्लाई) की सघनता का वैज्ञानिक आकलन किया. गोरेयाकोठी प्रखंड के सिसई और भगवानपुर हाट प्रखंड के रतौली गांव में वेक्टर डेंसिटी का निरीक्षण किया गया. इस दौरान वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत बालू मक्खियों को पकड़कर सुरक्षित रूप से संग्रहित किया गया. इन नमूनों का आगे प्रयोगशाला स्तर पर परीक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा.

बालू मक्खी की संख्या और सघनता का किया गया आकलन

केंद्रीय टीम के निरीक्षण का उद्देश्य प्रभावित गांवों में केवल बालू मक्खी की मौजूदगी का पता लगाना नहीं था, बल्कि उसकी संख्या, वितरण और सघनता का भी आकलन करना था. इससे कालाजार संक्रमण के संभावित जोखिम और वर्तमान वेक्टर नियंत्रण गतिविधियों की प्रभावशीलता को समझने में स्वास्थ्य विभाग को मदद मिलेगी.

सिसई और रतौली में हुआ वैज्ञानिक सर्वे

केंद्रीय निरीक्षण दल ने पहले गोरेयाकोठी प्रखंड के सिसई गांव का दौरा किया. इसके बाद भगवानपुर हाट प्रखंड के कालाजार प्रभावित रतौली गांव में सर्वे किया गया. दोनों स्थानों पर बालू मक्खियों को वैज्ञानिक तरीके से पकड़ा गया और आगे की जांच के लिए सुरक्षित रखा गया.

कालाजार नियंत्रण की रणनीति में अहम होंगे सर्वे के आंकड़े

स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, बालू मक्खी कालाजार का प्रमुख वाहक है. ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों में इसकी संख्या और सघनता की जानकारी बीमारी के नियंत्रण की रणनीति तैयार करने में अहम भूमिका निभाती है. नमूनों के वैज्ञानिक अध्ययन से संबंधित क्षेत्रों में वेक्टर की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सकेगा.

11 सितंबर तक चलेगा केंद्रीय टीम का निरीक्षण

केंद्रीय टीम का वेक्टर डेंसिटी निरीक्षण कार्यक्रम 7 से 11 सितंबर 2026 तक निर्धारित है. सीवान के गोरेयाकोठी, भगवानपुर हाट और बसंतपुर प्रखंड के कालाजार प्रभावित गांवों के साथ गोपालगंज के बरौली, बैकुंठपुर और मांझा प्रखंडों में भी बालू मक्खी की सघनता का आकलन किया जाएगा.

राष्ट्रीय से जिला स्तर तक के अधिकारी टीम में शामिल

निरीक्षण दल में राष्ट्रीय, राज्य, जोनल और जिला स्तर के अधिकारी एवं तकनीकी विशेषज्ञ शामिल रहे. राष्ट्रीय स्तर से नेशनल एंटोमोलॉजिस्ट यज्ञ नाथ प्रसाद शर्मा, मलेरिया इंस्पेक्टर अनिल नेगी और जुग्गुल किशोर मीणा शामिल रहे. राज्य स्तर से स्टेट एंटोमोलॉजिस्ट मोहन कुमार तथा जोनल स्तर से मुजफ्फरपुर के जोनल एंटोमोलॉजिस्ट नीरज कुमार सिंह मौजूद रहे.

जिला स्तर के अधिकारियों ने भी लिया निरीक्षण में हिस्सा

जिला स्तर पर जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. ओम प्रकाश लाल, पीरामल स्वास्थ्य के राजेश कुमार तिवारी, इंसेक्ट कलेक्टर रोहित कुमार और एफडब्ल्यू उपेंद्र कुमार सिंह निरीक्षण के दौरान मौजूद रहे.

सर्वे के आंकड़ों से तय होगी आगे की कार्ययोजना

डॉ. ओम प्रकाश लाल ने बताया कि कालाजार नियंत्रण के लिए नियमित निगरानी और वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी है. बालू मक्खी की वेक्टर डेंसिटी से प्राप्त आंकड़ों और नमूनों के अध्ययन के आधार पर प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी, नियंत्रण और अन्य गतिविधियों की आगे की कार्ययोजना तैयार करने में मदद मिलेगी.

मरीजों की पहचान के साथ सैंड फ्लाई पर भी निगरानी

स्वास्थ्य विभाग का जोर अब केवल कालाजार मरीजों की पहचान और उपचार तक सीमित रहने के बजाय बीमारी के प्रमुख वाहक बालू मक्खी पर लगातार निगरानी रखने पर भी है. इससे कालाजार नियंत्रण अभियान को अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है.

जांच करती केंद्रीय टीम | Prabhat Khabar Network

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By अमरनाथ शर्मा

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