Sitamarhi Sadar Hospital: विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के दौर में भी अंधविश्वास और पारंपरिक मान्यताओं का असर समाज के कई हिस्सों में अब भी देखने को मिलता है. सीतामढ़ी सदर अस्पताल में ऐसा ही एक मामला सामने आया, जिसने डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया. करंट लगने से गंभीर रूप से घायल एक युवक के इलाज के दौरान परिजन अस्पताल में ही कथित तौर पर ‘आटा थेरेपी’ का सहारा लेते नजर आए.
घटना रीगा थाना क्षेत्र के रामपुर गांव की है. बताया जाता है कि संतोष राय बिजली के करंट की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए. घटना के बाद परिजन उन्हें इलाज के लिए तत्काल सीतामढ़ी सदर अस्पताल लेकर पहुंचे.
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इलाज में जुटे डॉक्टर, परिजन करते रहे ‘आटा थेरेपी’
अस्पताल में पहुंचने के बाद डॉक्टर मरीज को चिकित्सकीय उपचार देने में जुट गए. इसी बीच परिजन और कुछ स्थानीय लोग कथित तौर पर ‘आटा थेरेपी’ के जरिए मरीज को ठीक करने की कोशिश करते दिखाई दिए. अस्पताल परिसर में यह दृश्य देख मौजूद लोग भी हैरान रह गए. डॉक्टरों ने भी इस तरह के प्रयास पर आश्चर्य जताया और कहा कि गंभीर स्थिति में केवल वैज्ञानिक और चिकित्सकीय उपचार पर ही भरोसा करना चाहिए.
करंट लगने के मामलों में तुरंत इलाज जरूरी
चिकित्सकों का कहना है कि इलेक्ट्रिक शॉक बेहद गंभीर स्थिति हो सकती है. ऐसे मामलों में शरीर के अंदरूनी अंगों, हृदय और तंत्रिका तंत्र पर असर पड़ सकता है. इसलिए मरीज को तत्काल अस्पताल पहुंचाकर विशेषज्ञ इलाज कराना जरूरी होता है. डॉक्टरों के अनुसार घरेलू नुस्खों, झाड़-फूंक या किसी अप्रमाणित उपचार पद्धति पर भरोसा करना मरीज के लिए खतरनाक साबित हो सकता है और इससे इलाज में देरी होने का जोखिम बढ़ जाता है.
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हालत गंभीर होने पर मुजफ्फरपुर रेफर
सदर अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद भी संतोष राय की स्थिति गंभीर बनी रही. इसके बाद चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें मुजफ्फरपुर स्थित मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर कर दिया. अस्पताल सूत्रों के अनुसार मरीज की लगातार निगरानी की जा रही है और आगे की चिकित्सा विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में होगी.
अंधविश्वास पर फिर उठे सवाल
यह घटना एक बार फिर समाज में मौजूद अंधविश्वास और वैज्ञानिक सोच के बीच की दूरी को उजागर करती है. विशेषज्ञों का मानना है कि आपातकालीन स्वास्थ्य परिस्थितियों में लोगों को केवल प्रशिक्षित चिकित्सकों की सलाह और प्रमाणित चिकित्सा पद्धति पर भरोसा करना चाहिए. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है, ताकि लोग गंभीर परिस्थितियों में समय पर सही इलाज प्राप्त कर सकें और किसी भी प्रकार के जोखिम से बच सकें.
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सीतामढ़ी से अमिताभ कुमार की रिपोर्ट
