सीतामढ़ी. शुक्रवार को रमजान महीने का पहला जुमा था. तमाम मस्जिदों एवं मदरसों में बड़ी संख्या में रोजेदार इकट्ठा होकर जुमे की नमाज अता की. जुमा की नमाज में शामिल मदरसा रहमानिया, मेहसौल मस्जिद के इमाम मौलाना मो खुर्शीद आलम ने जुमा की तकरीर में कहा कि रमजान आते ही जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं और जहन्नुम के दरवाजे बंद कर दिए जाते है. इस महीना में शैतान को कैद कर दिया जाता है. रमजान बरकत और मगफिरत का महीना है. इस महीना में अधिक से अधिक इबादत कर अल्लाह को राजी करें और अपनी मगफिरत कराएंं.अपना समय ज्यादातर इबादत में गुजारें. इस्लाम धर्म में जुमा का दिन महत्वपूर्ण है. रमजान में जुमा का महत्व और बढ़ जाता है. जुमा को छोटी ईद कहा जाता है. जुमा का आम दिनों में अलग मुकाम हासिल है. पांच वक्त की नमाज नहीं अदा करने वाले मुस्लिम भाई भी जुमा की नमाज जरूर अदा करते हैं.
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