बेकार पड़े नलकूप रहनुमा के इंतजार में पुपरी. सस्ते दर पर खेती की पटवन को लेकर कई दशकों पूर्व संचालित नलकूप योजना मृतप्राय, बदहाली पर आंसू बहाने को बेबश हैं, जबकि इसको लेकर किसान लंबे समय से आस लगाये हुए हैं. आखिर कब इस योजना का कायाकल्प होगा, यह एक यक्ष प्रश्न बना हुआ है. बताते चले कि वर्ष 1968 में सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत प्रखंड के बेलमोहन, बिरौली, भिट्ठा, भहमा व पूरा समेत प्रखंड के अन्य गांवों में खेतों में पटवन के उद्देश्य से इसका शुभारंभ किया गया. किसानों को सस्ते दर पर पटवन के लिए नलकूप से पानी की व्यवस्था कराने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये की लागत से बनी यह योजना आज भी मृतप्राय बना हुआ है. हालांकि इसके संचालन के लिए बोरिंग गाड़ा गया है. भवन व बिजली की भी व्यवस्था की गयी, नलकूप से पानी भी निकला, पर कुछ बिचौलियों के चलते यह महत्वाकांक्षी योजना स्थापना काल में ही दम तोड़ दिया और किसान लाभ से वंचित हो गये. अब जगह-जगह स्थापित, मगर बेकार पड़े ये नलकूप बेसब्री से किसी रहनुमा का इंतजार कर रहा है. जो इस समस्या के समाधान की पहल कर सके.
बेकार पड़े नलकूप रहनुमा के इंतजार में
बेकार पड़े नलकूप रहनुमा के इंतजार में पुपरी. सस्ते दर पर खेती की पटवन को लेकर कई दशकों पूर्व संचालित नलकूप योजना मृतप्राय, बदहाली पर आंसू बहाने को बेबश हैं, जबकि इसको लेकर किसान लंबे समय से आस लगाये हुए हैं. आखिर कब इस योजना का कायाकल्प होगा, यह एक यक्ष प्रश्न बना हुआ है. […]
