रविवार को कविता पाठ करते कवि .
शेखपुरा : पचसोइया व हजरवा हो गेलल बेकार सजनी, कि अब हो गेयल सब कार सजनी’. साहित्य संगम के जिला इकाई द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन में सरकार के नोटबंदी के आदेश के बाद हो रही आम लोगों की मुश्किलों का मुद्दा छाया रहा. कवि सम्मेलन में कवि उपेंद्र प्रसाद प्रेमी, ब्रजेश कुमार सुमन, रामचंद्र प्रसाद सिंह, चंदेश्वर प्रसाद, लखैरा लाल कुशवाहा, ममता कुमारी, योगेंद्र प्रसाद सिंह, अखिलेश्वर प्रसाद सिंह, कुशवाहा कृष्ण सहित बड़ी संख्या में कवियों ने अपनी मौलिक रचना प्रस्तुत की.
जिला कचहरी के मंच पर आयोजित इस कवि सम्मेलन में नोटबंदी का मुद्दा ही छाया रहा. सभी कवियों ने अपने-अपने नजरिये से नोटबंदी के बाद आने वाली समस्याओं को प्रस्तुत करने का प्रयास किया. बैंक,बैंक के एटीएम के आगे लगी लंबी कतार के साथ-साथ सोना तथा अन्य सामान के खरीदारी में आने वाली कठिनाई को कवियों ने उजागर करने का प्रयास किया. कवियों ने इसके अलावा देशभक्ति, सोच विरोधी, महंगाई,भ्रष्टाचार आदि से जुड़ी कविताओं का भी पाठ किया. इस आयोजन में अधिकांश कवियों ने मगही में अपनी कविता प्रस्तुत की. वरिष्ठ कवि रामचंद्र प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस कवि सम्मेलन में सबसे पहले मगही को संविधान के आठवीं अनुसूचि में शामिल करने की मांग की गयी. कवियों ने इस कार्य के लिए आम लोगों को आगे आने का आह्वान किया.
इस मौके पर श्री सिंह ने बताया कि मगध क्षेत्र के इन कवियों का संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक इसे संविधान की आठवीं अनुसूचि में शामिल नहीं कर लिया जाय. इस अभियान में आम लोगों की भागीदारी पर बल दिया गया. कवि सम्मेलन में देश की सीमा पर शहीद होने वाले जवानों को भी श्रद्धांजलि दी गयी.
