रोष. मटोखर दह की खुदाई को लेकर सड़क पर उतरी महिलाएं
शेखपुरा : जिले के सबसे बड़े प्राकृतिक जल स्रोत को सिंचाई व्यवस्था के रूप में एक मजबूत साधन के रूप में मांग को लेकर मटोखर दह की खुदाई पर अड़े स्थानीय ग्रामीणों ने सोमवार को भी शेखपुरा-शेखोपुरसराय सड़क मार्ग को ठप रखा. इस दौरान बड़ी तादाद में जुटे ग्रामीण महिलाओं ने आक्रोश प्रकट करते हुए सड़क मार्ग पर बड़े और छोटे सभी वाहनों के आवागमन को रोक कर रखा. सड़क पर आंदोलन कर रहे महिलाओं का वाहन चला संचालक और यात्रियों के साथ नोक-झोंक भी हुआ.
इस मौके पर ग्रामीण महिलाओं ने मांग करते हुए कहा कि शेखपुरा प्रखंड के कारे पंचायत सिंचाई के क्षेत्र में आज भी पिछड़ा इलाका माना जाता है. यहां सिंचाई के लिए सरकार के द्वारा एक भी राजकीय नलकूप नहीं लगाया गया है. ऐसे में दह की खुदाई अगर की गयी तो किसानों के सैकड़ों एकड़ खेत को सिंचाई की सुविधा के साथ-साथ वर्षा जल आच्छादन की बड़ी व्यवस्था हो सकेगी. महिलाओं ने आरोप लगाया कि लंबे समय से चल रहे आंदोलन के बाद जिला प्रशासन ने दह की खुदाई का रास्ता निकालते हुए दनियावां शेखपुरा रेलखंड निर्माण कार्य में लगी कंपनी एमजी सीपीएल को मिट्टी खुदाई का अनुमति दिया था, लेकिन करीब आठ दिन पूर्व उक्त कंपनी के द्वारा की जा रही खुदाई कार्य पर रोक लगा दिया गया था. सड़क जाम कर रही महिलाओं में सुमित्रा देवी,साबो देवी,जुगनू कुमार समेत अन्य लोगों ने बताया कि तीन दिन पूर्व सड़क जाम के बाद अब अधिकारियों को लिखित आवेदन दिया है. दह की खुदाई कार्य के बहाल करने को लेकर आंदोलन जारी रहेगा. करीब चार घंटों तक सड़कों पर ईंट, पत्थर व बांस लगा कर आवागमन ठप करने के बाद मौके पर पहुंची थाना पुलिस ने ग्रामीणों को समझा-बुझाकर यातायात को बहाल किया.
क्या है मामला :
जिले के ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वकांक्षी मटोखर दह सबसे बड़ी प्राकृतिक स्रोत के रूप में अपना महत्व रखता है. पिछले कुछ सालों से बारिश के कमी व सतही गाद जम जाने के कारण उक्त जल स्रोत का पानी सूख जाता है. ऐसे में पिछले लंबे समय से स्थानीय ग्रामीणों के द्वारा दह की खुदाई की मांग की जा रही थी. यहां रेलवे कार्य में जुटे एमजीसीपीएल कंपनी को जिला प्रशासन ने दह की खुदाई के लिए निर्देश जारी किया था. इसके लिए कंपनी ने खनन राजस्व के रूप में करीब 64 लाख रुपये की राशि जमा करायी थी. पिछले एक माह से चल रहे खुदाई कार्य में एक किलोमीटर लंबी मटोखर दह के दक्षिणी हिस्से से मिट्टी का उठाव किया जा रहा था. अनियमितता का मामला सामने आने के बाद अपर समाहर्ता जवाहरलाल ने मिट्टी खुदाई पर पांच दिन पहले ही रोक लगा दिया था. इस प्रशासनिक रोक के विरोध में शनिवार को मातोखर गांव के सैकड़ों लोग सड़क पर उतर आये और खुदाई मांग करने लगे.
सड़क को जाम करतीं महिलाएं.
मत्स्य विभाग से नहीं ली गयी अनापत्ति
ऐतिहासिक पोखरा का स्वामित्व मत्स्य विभाग को है. इसकी नियमित बंदोबस्ती मत्स्य पालकों को हैचरी के रूप में कराया जाता है. इसकी बंदोबस्ती में आने वाले राजस्व का लेखा-जोखा मत्स्य विभाग ही रखता है. जानकारी के मुताबिक मटोखर दह किसी भी जलघर की खुदाई का अधिकार मत्स्य विभाग को ही है. मिट्टी खुदाई के बाद जलखर से निकाले गए मिट्टी को तालाब के मेड़ पर ही डालने का प्रावधान है, लेकिन सबसे बड़ी विडंबना यह है कि पोखर की खुदाई के लिए जिला प्रशासन ना तो मत्स्य विभाग से किसी प्रकार का अनापत्ति लिया. मिट्टी खुदाई कर अवैध तरीके से इसे कमर्शियल प्रयोग में लाया गया. इस स्थिति में जिला प्रशासन पर मिट्टी खुदाई में नियमों की अनदेखी का मामला सामने आते ही इस पर आनन-फानन में रोक लगाया गया.
क्या कहते हैं अधिकारी
मटोखर दह की खुदाई के लिए एमजीसीपीएल नामक कंपनी के द्वारा खनन विभाग में 66 लाख रुपये का राजस्व जमा कराया है. इसके साथ ही ग्रामीणों की मांग पर मटोखर दह की खुदाई का कार्य कराया जा रहा था, लेकिन फिलहाल खुदाई पर रोक लगा दिया गया है.
जवाहर प्रसाद, उपर समाहर्ता शेखपुरा
