Rohtas News : रोहतास जिले के तिलौथू स्थित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के पूर्व प्रभारी प्रधानाध्यापक मैकू राम पर फर्जी STET प्रमाण पत्र के आधार पर उच्चतर माध्यमिक शिक्षक के पद पर नियोजन का लाभ लेने के आरोप में शिक्षा विभाग ने शिकंजा कस दिया है. जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, स्थापना, रोहतास ने एक सितंबर 2026 को पत्र जारी कर उनसे स्पष्टीकरण मांगा है. पत्र प्राप्ति के तीन दिनों के अंदर साक्ष्य और संबंधित अभिलेखों के साथ अपना पक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है.
शिकायत के बाद शुरू हुई मामले की जांच
विभागीय पत्र के अनुसार उप विकास आयुक्त सह मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद, रोहतास के 26 फरवरी 2026 के पत्र के माध्यम से परिवादी योगेन्द्र प्रसाद सिंह और अशोक कुमार मौर्य ने मैकू राम के खिलाफ शिकायत उपलब्ध करायी थी. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उन्होंने फर्जी STET प्रमाण पत्र के आधार पर उच्चतर माध्यमिक शिक्षक के पद पर नियोजन का लाभ लिया है. शिकायत मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने मामले की जांच शुरू की.
विभाग ने मांगे थे शैक्षणिक और STET प्रमाण पत्र
जांच के क्रम में विभाग की ओर से सात अप्रैल और 15 अप्रैल 2026 को पत्र जारी कर मैकू राम से शिक्षक पद पर नियोजन से संबंधित सभी शैक्षणिक, प्रशैक्षणिक प्रमाण पत्र और STET प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने को कहा गया था. विभागीय पत्र में कहा गया है कि मांगे गये दस्तावेज अब तक उपलब्ध नहीं कराये गये.
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से कराया गया प्रमाण पत्र का सत्यापन
बाद में परिवादी की ओर से STET प्रमाण पत्र और अंक पत्र उपलब्ध कराये गये. इसके बाद विभाग ने 13 अगस्त 2026 को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, पटना को दोनों दस्तावेज सत्यापन के लिए भेजे. विभाग के अनुसार समिति के अपर सचिव ने 29 अगस्त को सत्यापन प्रतिवेदन उपलब्ध कराया.
2011 की परीक्षा में शामिल नहीं होने का उल्लेख
विभागीय पत्र में सत्यापन प्रतिवेदन के हवाले से कहा गया है कि समिति के अभिलेख DTR के आधार पर BSITET परीक्षा वर्ष 2011 के द्वितीय पत्र में मैकू राम के शामिल नहीं होने की बात दर्ज है. इसी आधार पर विभाग ने उनके प्रमाण पत्र और अंक पत्र में कूटरचना कर शिक्षक पद पर नियोजन का लाभ लेने की आशंका जतायी है.
तीन दिनों में देना होगा स्पष्टीकरण
शिक्षा विभाग ने मैकू राम से पूछा है कि बिहार जिला परिषद माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालय सेवा नियमावली 2020 के तहत उनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जाए. विभाग ने पत्र प्राप्ति के तीन दिनों के अंदर संतोषजनक स्पष्टीकरण और साक्ष्य उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है. निर्धारित अवधि में जवाब नहीं मिलने या स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाए जाने पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की बात कही गयी है.
