Rohtas News : करगहर पंचायत को नगर पंचायत का स्वरूप देने की प्रक्रिया के बीच प्रस्तावित सीमांकन को लेकर ग्रामीणों ने आपत्ति जताई है. ग्रामीणों ने बीडीओ को आवेदन देकर भौगोलिक और आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर नगर पंचायत की सीमा पर पुनर्विचार करने की मांग की है. आवेदन में करगहर से जुड़े कुछ गांवों को नगर पंचायत में शामिल करने, जबकि कृषि प्रधान गांवों को इससे बाहर रखने की मांग की गई है.
नीमडीहरा को नगर पंचायत में शामिल करने की मांग
ग्रामीणों ने कहा कि करगहर पंचायत के नीमडीहरा गांव को प्रस्तावित करगहर नगर पंचायत में शामिल किया जाना चाहिए. ग्रामीणों के अनुसार नीमडीहरा लंबे समय से करगहर पंचायत का हिस्सा रहा है और भौगोलिक रूप से भी करगहर के मध्य क्षेत्र में स्थित है. गांव का करगहर से सीधा जुड़ाव है तथा यहां गैर-कृषि गतिविधियां भी लगातार बढ़ रही हैं. ऐसे में गांव को नगर पंचायत से बाहर रखना उचित नहीं होगा.
डिभिया और गर्भे गांव को भी जोड़ने की मांग
आवेदन में करगहर से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित डिभिया एवं गर्भे गांव को भी नगर पंचायत में शामिल करने की मांग की गई है. ग्रामीणों का कहना है कि दोनों गांवों में गैर-कृषि गतिविधियां बढ़ रही हैं और भौगोलिक रूप से इनका करगहर से सीधा जुड़ाव है. इसलिए नगर पंचायत की सीमा तय करते समय इन गांवों को भी शामिल किया जाना चाहिए.
सेमरी और लखनपुरा को शामिल करने पर आपत्ति
दूसरी ओर, सेमरी पंचायत के सेमरी एवं लखनपुरा गांव को करगहर नगर पंचायत में शामिल किए जाने की प्रक्रिया पर ग्रामीणों ने आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि सेमरी पंचायत का नाम ही सेमरी गांव के नाम पर है और यह पंचायत का सबसे बड़ा गांव है. दोनों गांव मुख्य रूप से कृषि प्रधान हैं. ऐसे में इन्हें नगर पंचायत में शामिल करने के बजाय सेमरी पंचायत में ही रखा जाना अधिक उचित होगा.
सहुआर और सोनी गांव को लेकर भी सवाल
रूपैठा पंचायत के सहुआर एवं सोनी गांव को करगहर नगर पंचायत में शामिल करने पर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं. आवेदनकर्ताओं के अनुसार ये दोनों गांव भी मुख्य रूप से कृषि आधारित हैं. ग्रामीणों का तर्क है कि एक तरफ कृषि प्रधान गांवों को नगर पंचायत में शामिल किया जा रहा है, जबकि करगहर के नजदीक स्थित गैर-कृषि गतिविधियों वाले गांवों को बाहर रखा जा रहा है. इससे नगर पंचायत के संतुलित एवं व्यवस्थित विकास को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.
करगहर पंचायत को दो भागों में बांटने की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से नगर पंचायत की सीमा का भौगोलिक और आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर पुनर्विचार करने की मांग की है. साथ ही नगर पंचायत में शामिल किए जाने वाले गांवों का पुनर्निर्धारण करने तथा करगहर पंचायत को दो भागों में विभाजित करने की मांग भी की गई है.
मुख्यमंत्री और डीएम को भी भेजी आवेदन की प्रतिलिपि
ग्रामीणों ने आवेदन की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, बिहार सरकार, राज्य निर्वाचन आयोग, बिहार और जिलाधिकारी, रोहतास को भी भेजी है. आवेदनकर्ताओं का कहना है कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाता है तो करगहर नगर पंचायत का स्वरूप अधिक व्यवस्थित, संतुलित और जनहितकारी बनाया जा सकता है.
