सासाराम के फजलगंज स्थित संयुक्त कृषि सभागार में शुक्रवार को कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण (आत्मा) के तत्वावधान में 'कृषक-वैज्ञानिक वार्तालाप' कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस विशेष संवाद सत्र का मुख्य उद्देश्य किसानों और कृषि वैज्ञानिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित कर खरीफ फसलों में आने वाली व्यावहारिक व स्थानीय समस्याओं का त्वरित और वैज्ञानिक समाधान उपलब्ध कराना था.
वैज्ञानिकों से सीधा संवाद, खरीफ फसलों की समस्याओं का समाधान
आत्मा के उप परियोजना निदेशक संतोष यादव ने बताया कि कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र (बिक्रमगंज) के मुख्य कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुशील सिंह ने किसानों से सीधा संवाद किया. इस दौरान जिले भर से पहुंचे किसानों ने खरीफ मौसम में फसलों पर कीटों और विभिन्न रोगों के प्रकोप, उर्वरकों के सही इस्तेमाल, मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने और आधुनिक वैज्ञानिक विधियों को अपनाने से संबंधित समस्याएं रखीं. वैज्ञानिकों ने किसानों के एक-एक सवाल का वैज्ञानिक और व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करते हुए आवश्यक कृषि परामर्श दिए.
'खेत बचाओ अभियान' और अंधाधुंध कीटनाशकों पर रोक की अपील
कार्यक्रम के दौरान "खेत बचाओ अभियान" पर विशेष बल दिया गया. कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को आगाह किया कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का अंधाधुंध प्रयोग मिट्टी की उर्वरा शक्ति और फसलों दोनों को बर्बाद कर रहा है. उन्होंने किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर ही संतुलित खाद का उपयोग करने और समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन (आईपीएम) अपनाने की सलाह दी. वैज्ञानिकों ने स्पष्ट कहा कि किसी भी कीट के दिखने पर सीधे दवा न छिड़कें, बल्कि विशेषज्ञों की सलाह पर अनुशंसित दवाओं का ही सीमित उपयोग करें, जिससे उत्पादन लागत घटे और उपज बढ़े.
कृषि विभाग के कई प्रमुख अधिकारी रहे उपस्थित
इस महत्वपूर्ण संवाद सत्र में जिला कृषि पदाधिकारी (डीएओ) प्रभाकर कुमार, सहायक निदेशक (कृषि अभियंत्रण/भूमि संरक्षण) दिलीप शर्मा, सहायक निदेशक (पौधा संरक्षण) संतोष कुमार, जिला उद्यान पदाधिकारी जितेंद्र कुमार, सहायक निदेशक (विपणन) सह विशेष पदाधिकारी कमला तिवारी, अभिषेक तिवारी और अखिलेश कुमार पांडेय सहित बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे.
