Sasaram Primary School Education Negligence : रोहतास के दिनारा में सरकार जहां शिक्षा के अधिकार और नई शिक्षा नीति की बात करती है, वहीं जमीनी स्तर पर हालात कुछ और ही तस्वीर पेश कर रहे हैं. दिनारा प्रखंड के राजपुर पंचायत स्थित प्राथमिक विद्यालय मौडीहरा में कक्षा 2, 3 और 4 के दर्जनों बच्चे पिछले तीन महीनों से पाठ्य पुस्तकों के बिना ही पढ़ाई करने को मजबूर हैं.
बिना किताब के ही हो गई परीक्षा
सबसे हैरानी की बात यह है कि बच्चों को अब तक किताबें नहीं मिलीं, लेकिन त्रैमासिक परीक्षा जरूर ले ली गई. इसको लेकर अभिभावकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है.
Sasaram News : अभिभावकों में आक्रोश
स्थानीय अभिभावक हरिओम ओझा ने नाराजगी जताते हुए कहा कि बच्चे रोज स्कूल जाते हैं, कॉपी-कलम लेकर बैठते हैं, लेकिन पढ़ने के लिए किताब ही नहीं है. उन्होंने कहा कि बाजार में भी किताबें उपलब्ध नहीं हैं, ऐसे में बिना किताब के परीक्षा लेना बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है.
शिक्षकों के सामने भी चुनौती
किताबों की कमी के कारण शिक्षकों को भी पढ़ाई कराने में काफी दिक्कत हो रही है. वे ब्लैकबोर्ड और एक सेट किताब के सहारे सभी बच्चों को पढ़ाने को मजबूर हैं. इससे न तो बच्चों को सही ढंग से होमवर्क मिल पा रहा है और न ही वे घर पर पढ़ाई दोहरा पा रहे हैं.
Shiksha Vibhag : विभागीय लापरवाही का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय लापरवाही के कारण बच्चे पहले से ही पाठ्यक्रम में पिछड़ते जा रहे हैं. ऐसे में परीक्षा परिणाम पर भी इसका असर पड़ना तय है.
क्या कहते हैं शिक्षा पदाधिकारी
मामले में प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी मधुरेंद्र कुमार ने बताया कि विभाग से जितनी किताबें मिली थीं, उनका शत-प्रतिशत वितरण कर दिया गया है. जिन कक्षाओं में कमी है, उसके लिए अतिरिक्त पुस्तकों की मांग की गई है.
उन्होंने कहा कि पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए हर कक्षा में एक सेट किताब उपलब्ध कराई गई है. जैसे ही नई किताबें मिलेंगी, वंचित बच्चों के बीच तुरंत वितरण किया जाएगा.
