छपरा. छपरा जंक्शन पर यात्रियों की सुविधा के लिए लगाये गये लिफ्ट और एस्केलेटर की बदहाली की खबर को जब प्रभात खबर ने प्रमुखता से प्रकाशित किया, तो रेलवे के अधिकारी हरकत में आये. तीन में से दो लिफ्ट को चालू कर दिया गया है. शेष एक लिफ्ट को चालू करने का प्रयास किया जा रहा है. दरअसल लिफ्ट बंद रहने से दिव्यांग, बीमार व बुजुर्ग यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
सबसे उपयोगी प्लेटफॉर्म संख्या एक का लिफ्ट अब भी बंद
अधिकारी हरकत में तो आये हैं, लेकिन उनकी कार्यशैली यह बता रही है कि लिफ्ट के बंद रहने से उनका इससे कोई वास्ता नहीं है. अभी तक सबसे ज्यादा उपयोग किये जाने वाला प्लेटफॉर्म संख्या एक का लिफ्ट अब भी बंद है. इसकी मरम्मत नहीं हो पायी है और अधिकारी एक-दूसरे पर दोषारोपण का खेल खेल रहे हैं.चलंत सीढ़ी भी है बंद, अधिकारी आते हैं तो चलती है
प्लेटफार्म पर लगे एस्केलेटर (चलंत सीढ़ी) की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है. यह केवल किसी वरिष्ठ अधिकारी के दौरे के दौरान ही कुछ समय के लिए चलती है, अन्यथा बंद ही रहती है. आमलोग इसे सामान्य सीढ़ी की तरह इस्तेमाल करने को मजबूर हैं. यात्रियों ने रेल प्रशासन से शीघ्र स्थायी समाधान की मांग की है, ताकि उन्हें सुविधा मिल सके, न कि सिर्फ आश्वासन.टालमटोल का खेल में अधिकारी पास, यात्री फेल
स्टेशन अधीक्षक से जब इस संबंध में पूछा गया, तो उन्होंने मामला बिजली कंपनी के हवाले किया. वहीं, बिजली कंपनी ने जिम्मेदारी लिफ्ट लगाने वाली कंपनी पर डालते हुए बताया कि देखरेख की जिम्मेदारी कंपनी की है, लेकिन कंपनी स्टाफ की कमी का हवाला देकर समय पर मरम्मत नहीं कर पा रही है. उन्होंने यह भी बताया कि यात्रियों द्वारा लिफ्ट का गलत ढंग से इस्तेमाल भी समस्या की एक बड़ी वजह है. कई बार ऐसे लोग जो लिफ्ट संचालन से अनभिज्ञ होते हैं, वे बार-बार बटन दबाकर सेंसर को खराब कर देते हैं. बिजली कंपनी ने यह भी कहा कि लिफ्ट दिव्यांगों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए बनाया गया है, लेकिन इसका अधिक उपयोग युवा और सामान बेचने वाले खोमचे वाले कर रहे हैं, जिससे मूल उद्देश्य प्रभावित हो रहा है.
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