सदर अस्पताल में बायोमेट्रिक हाजिरी बनाने के बाद ओपीडी से नदारद रहते हैं चिकित्सक

सदर अस्पताल में चिकित्सकों और कर्मियों के अटेंडेंस के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी प्रणाली लागू की गयी है, लेकिन इसके बावजूद अस्पताल की व्यवस्था में अपेक्षित सुधार देखने को नहीं मिल रहा है.

छपरा. सदर अस्पताल में चिकित्सकों और कर्मियों के अटेंडेंस के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी प्रणाली लागू की गयी है, लेकिन इसके बावजूद अस्पताल की व्यवस्था में अपेक्षित सुधार देखने को नहीं मिल रहा है. आये दिन डॉक्टरों की लेट-लतीफी और समय पर विभाग में नहीं पहुंचने की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. उपाधीक्षक डॉ केएम दुबे ने पदभार ग्रहण करने के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली को दुरुस्त करने के लिए आये दिन चिकित्सकों की विभाग मे मौजूदगी को लेकर जांच भी कर रहे है.

विदित हो कि ओपीडी में कुल पांच बायोमेट्रिक मशीनें लगायी गयी हैं, जिनके माध्यम से चिकित्सक व कर्मचारी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं. वेतन भुगतान भी इसी बायोमेट्रिक हाजिरी के आधार पर किया जाता है. इसके बावजूद कई डॉक्टर देर से अस्पताल पहुंच रहे हैं, जिससे ओपीडी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं. सुबह से इलाज के इंतजार में बैठे मरीजों को घंटों प्रतीक्षा करनी पड़ती है. कई विभागों में डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण मरीजों को लौटना पड़ता है. अब सवाल यह उठ रहा है कि जब उपस्थिति दर्ज करने के लिए बायोमेट्रिक व्यवस्था है, तो फिर समय पालन क्यों नहीं हो पा रहा है. सिर्फ मशीन लगाने से व्यवस्था सुधर पायेगी.

हाजिरी बनाने के बाद विभाग से चले जाते हैं कई चिकित्सक

सदर अस्पताल में चिकित्सकों का अटेंडेंस बायोमैट्रिक से बनता है. लेकिन कई ऐसे चिकित्सक हैं. जो पहले शिफ्ट में ड्यूटी के लिए बायोमैट्रिक अटेंडेंस बनाकर शहर में संचालित अपने निजी क्लीनिक को पर चले जाते हैं. ऐसे में विभाग में इलाज के लिए आये मरीजों को घंटे इंतजार करना पड़ता है. जिससे अफरातफरी की स्थिति रहती है. चिकित्सकों की अनुपस्थिति को लेकर कई बार मरीजों के परिजनों द्वारा हंगामा भी किया जा चुका है. फिर भी व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है. कई मरीजों का आरोप है कि चिकित्सक पहले शिफ्ट में आते हैं. 15 से 20 मिनट इलाज करने के बाद न जाने कहां चले जाते हैं. सदर अस्पताल के ओपीडी में कई ऐसे विभाग है. जहां काफी भीड़ होती है. खासकर मेडिसिन, चाइल्ड वार्ड, ऑर्थोपेडिक्स आदि में दिनभर मरीजों का आना-जाना लगा रहता है. लेकिन इन विभागों में मौजूद कई चिकित्सक बायोमेट्रिक हाजिरी देने के बाद गायब नजर आते हैं.

नियमित मॉनीटरिंग के बाद भी नहीं हो रहा सुधार

ओपीडी मे लगे बायोमेट्रिक हाजिरी व्यवस्था से कई बार नाराज होकर चिकित्सकों ने कार्य से अपने को दूर कर लिया है. पूर्व सिविल सर्जन डॉ सागर दुलाल सिन्हा के कार्यकाल में कई बार चिकित्सकों का वेतन भी रोक दिया गया. जिससे कि यह प्रमाणित होता है कि कई चिकित्सक हजारी तो बनाते हैं लेकिन ड्यूटी पर मौजूद नहीं रहते हैं. हाजिरी बनाकर निजी कार्य से चले जाते हैं. सवाल यह उठता है कि बायोमेट्रिक हाजिरी प्रणाली में कहीं ना कहीं कोई खेल है या फिर मनमानी.

क्या कहते हैं उपाधीक्षक

बायोमेट्रिक मशीन को अपडेट करने के लिए विभाग को सूचना दी गयी है. अगर किसी तरह का कोई मनमानी करता है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जायेगी.डॉ केएम दुबे

उपाधीक्षक, सदर अस्पताल, छपरा

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लेखक के बारे में

Author: ALOK KUMAR

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