Saran Flood: सारण जिले में नदियों के जलस्तर में अप्रत्याशित कमी दर्ज की जा रही है. जल संसाधन विभाग की ओर से विभिन्न नदी घाटों पर पानी का मेजरमेंट किए जाने के बाद सामने आया है कि कई स्थानों पर प्रतिदिन 13 से 30 सेंटीमीटर तक जलस्तर घट रहा है. नदियों के घटते जलस्तर से बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोगों को राहत मिली है. कई पंचायतों में बाढ़ का पानी कम होने के बाद ग्रामीण अब धीरे-धीरे अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं. लोग घरों की सफाई के साथ पशुओं की देखभाल में जुट गए हैं.
जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ का पानी निकलने के बाद संभावित महामारी की रोकथाम को लेकर स्वच्छता और सुरक्षात्मक गतिविधियां भी शुरू की गई हैं. प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें निगरानी कर रही हैं.
8 प्रखंडों के 40 पंचायतों के 130 गांव बाढ़ प्रभावित
जिले के 8 प्रखंडों के 40 पंचायत या नगर पंचायत क्षेत्रों के 130 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं. इन क्षेत्रों में कुल 2,41,932 से अधिक आबादी प्रभावित हुई है. बाढ़ की स्थिति गंभीर होने पर करीब 1,200 लोगों को प्रभावित क्षेत्रों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था. अब जलस्तर में कमी के बाद कई इलाकों में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने लगी है.
96 नावों से जारी है आवागमन और राहत-बचाव कार्य
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन और राहत-बचाव कार्य के लिए 96 नावों का परिचालन किया जा रहा है. पानी कम होने के बावजूद कई गांवों में सड़क संपर्क पूरी तरह बहाल नहीं हुआ है. ऐसे में ग्रामीण अभी भी नाव के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान तक आवागमन कर रहे हैं.
16 मेडिकल कैंप में मिल रही स्वास्थ्य सुविधा
बाढ़ प्रभावित लोगों को तत्काल स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 16 मेडिकल कैंप संचालित किए जा रहे हैं. इसके अलावा मोबाइल मेडिकल टीमों के माध्यम से भी प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं. आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है, ताकि बाढ़ का पानी निकलने के बाद संक्रमण या बीमारी फैलने की स्थिति में तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जा सके.
9 सामुदायिक रसोई में 55 हजार से अधिक लोगों को भोजन
प्रभावित लोगों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए 9 सामुदायिक रसोई केंद्र संचालित हैं. इन केंद्रों के माध्यम से अब तक 55,730 लोगों को भोजन कराया जा चुका है. इसके अलावा जरूरतमंद परिवारों के बीच 18,044 खाद्य एवं ड्राई राशन पैकेट का वितरण किया गया है. बाढ़ राहत शिविरों में रह रहे लोगों को भी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं.
पशुओं के लिए 8 आश्रय स्थल संचालित
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के संरक्षण और सुरक्षा की भी व्यवस्था की गई है. पशुओं के लिए 8 आश्रय स्थल संचालित हैं, जहां 678 पशुओं को आश्रय दिया गया है. पशु आश्रय स्थलों और प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं की देखभाल, आवश्यक उपचार, पशु चिकित्सा सेवा और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है.
जरूरतमंदों के बीच 20,919 पॉलिथीन शीट वितरित
बाढ़ प्रभावित और जरूरतमंद परिवारों के बीच अब तक 20,919 पॉलिथीन शीट का वितरण किया गया है. प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री उपलब्ध कराने का काम भी जारी है.
घाघरा का जलस्तर 18 सेंटीमीटर घटा
बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल की 10 सितंबर की सुबह 8 बजे की रिपोर्ट के अनुसार छपरा में घाघरा नदी का खतरे का निशान 53.68 मीटर है. यहां जलस्तर 18 सेंटीमीटर घटकर 52.58 मीटर हो गया है. नदी खतरे के निशान से 1.10 मीटर नीचे बह रही है.
सिसवन में घाघरा का जलस्तर स्थिर
सिसवन में घाघरा नदी का खतरे का निशान 57.04 मीटर बताया गया है. यहां पिछले करीब 48 घंटे से जलस्तर 57.23 मीटर पर स्थिर है. नदी खतरे के निशान से करीब 19 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है.
गंडक के जलस्तर में भी कमी
हाजीपुर में गंडक नदी का जलस्तर 50.05 मीटर दर्ज किया गया है. यहां 13 सेंटीमीटर की कमी आई है. नदी खतरे के निशान से 27 सेंटीमीटर नीचे बह रही है. वहीं रेवा में गंडक का जलस्तर 53.49 मीटर है. यहां 30 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई है और नदी खतरे के निशान से 92 सेंटीमीटर नीचे बह रही है.
गंगा का जलस्तर घटा, फिर भी खतरे के निशान से ऊपर
गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 49.57 मीटर दर्ज किया गया है. यहां 13 सेंटीमीटर की कमी आई है. हालांकि नदी अभी भी खतरे के निशान से करीब 1.37 मीटर ऊपर बह रही है. जलस्तर में लगातार कमी को देखते हुए प्रभावित इलाकों के लोगों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है.
सारण में नदियों का वर्तमान जलस्तर
| नदी | खतरे का निशान | वर्तमान जलस्तर | स्थिति |
| गंगा, गांधी घाट | 50.40 मीटर | 49.57 मीटर | 13 सेमी कमी |
| गंडक, हाजीपुर | 50.45 मीटर | 50.05 मीटर | 13 सेमी कमी |
| गंडक, रेवा | 54.41 मीटर | 53.49 मीटर | 30 सेमी कमी |
| सरयू/घाघरा, सिसवन | 57.15 मीटर | 57.23 मीटर | जलस्तर स्थिर |
| घाघरा, छपरा | 53.68 मीटर | 52.58 मीटर | 18 सेमी कमी |
क्या बोले अधिकारी
बाढ़ प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार प्रभाकर ने कहा कि जलस्तर में लगातार कमी हो रही है, जो सुकून देने वाली बात है. किसी भी नदी घाट पर पानी का दबाव नहीं है. सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए हैं. जिलाधिकारी के आदेश पर प्रतिदिन जलस्तर की मॉनिटरिंग की जा रही है.
गांवों में अभी भी नाव से हो रहा आवागमन
जलस्तर में कमी के बावजूद कई बाढ़ प्रभावित गांवों में पानी पूरी तरह नहीं निकला है. ऐसे में ग्रामीण अभी भी नाव के सहारे आवागमन कर रहे हैं. पानी घटने के बाद घर लौटे लोग अब अपने घरों की सफाई और पशुओं की देखभाल में जुट गए हैं. प्रशासन की ओर से भी बाढ़ के बाद स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों पर विशेष जोर दिया जा रहा है.
