Saran News: तरैया प्रखंड में मनरेगा योजनाओं को लेकर कार्यक्रम पदाधिकारी (पीओ) सुजीत कुमार सिंह और डेवढ़ी पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि दिलीप सिंह के बीच का विवाद गहरा गया है. पीओ ने मुखिया प्रतिनिधि के गुर्गों पर जानलेवा हमला करने, बंदूक के कुंदे से वार करने और गमछे से गला दबाने का आरोप लगाते हुए तरैया थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है. घटना के बाद से प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारे में हड़कंप मच गया है.
रास्ते में घेरकर जानलेवा हमले का आरोप
दर्ज प्राथमिकी में पीओ सुजीत कुमार सिंह ने कहा है कि वह तरैया कार्यालय से अकेले दिघवारा के आपदा डुमरी योगदान देने जा रहे थे. इसी बीच नारायणपुर पीएनबी शाखा के पास मुखिया प्रतिनिधि द्वारा भेजे गए सात लोगों ने उन्हें हथियार दिखाकर घेर लिया. आरोप है कि गला दबाकर उन्हें जान से मारने की कोशिश की गई और सिर पर बंदूक से प्रहार किया गया. इसके बाद वह किसी तरह जान बचाकर भागे.
पचास हजार रिश्वत मांगने का लगाया आरोप
इधर मुखिया प्रतिनिधि दिलीप सिंह ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए झूठा और बेबुनियाद करार दिया है. उनका कहना है कि मारपीट जैसी कोई घटना हुई ही नहीं है. उन्होंने उल्टा आरोप लगाया कि योजनाओं के भुगतान और संचालन के एवज में पीओ उनसे 50 हजार रुपये घूस मांग रहे थे. जब रिश्वत देने से मना कर दिया गया, तो दबाव बनाने के लिए यह फर्जी केस दर्ज कराया गया है.
मुखिया संघ ने दी आंदोलन की चेतावनी
पीओ ने भी रिश्वत मांगने के आरोपों को पूरी तरह मनगढ़ंत बताया है. इस बीच मामले में मुखिया संघ भी कूद पड़ा है. संघ के प्रखंड अध्यक्ष मुकेश कुमार यादव ने कहा कि मनरेगा पीओ दुर्भावना से काम कर रहे हैं. उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि मुखिया प्रतिनिधि को झूठे मुकदमे से मुक्त नहीं किया गया, तो संघ उग्र आंदोलन करेगा. पुलिस दोनों पक्षों के बयान लेकर छानबीन में जुटी है.
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