छपरा में रेस्टोरेंट्स के मेन्यू से गायब है लिट्टी-चोखा, सिर्फ फुटपाथों तक ही बची है पहचान है

छपरा के रेस्टोरेंट्स में लिट्टी-चोखा क्यों नहीं मिलता? जानिए क्यों बिहार की यह मशहूर डिश सिर्फ फुटपाथों तक ही सिमट कर रह गई है।

'''' लिट्टी चोखा सिर्फ छपरा की नहीं बल्कि पूरे बिहार की पहचान रही है. बिहार के बाहर दूसरे प्रदेशों में भी इस व्यंजन को लोग चाव से खाते हैं. हालांकि छपरा में लिट्टी चोखा की पहचान सिर्फ फुटपाथों तक ही सीमित रह गयी है. शहर के रेस्टोरेंट के मेन्यू में लिट्टी चोखा को शामिल नहीं किया गया है. बाहर से छपरा घूमने या किसी जरूरी काम से आये लोग जब रेस्टोरेंट में आकर लिट्टी चोखा की डिमांड करते हैं तो उन्हें निराशा हाथ लगती है.'''' प्रतिनिधि. छपरा. शहर में बीते एक दशक में रेस्टोरेंट कल्चर का तेजी से विस्तार हुआ है. फास्ट फूड के नाम पर चाइनीज, साउथ इंडियन व मुगलई व्यंजनों को परोसने की होड़ लगी है. पिज्जा-बर्गर तथा बिरयानी खाने वालों की संख्या भी बढ़ी है. हालांकि जिस व्यंजन से सारण जिले की विशेष पहचान है. उस व्यंजन को मेन्यू में शामिल करने में रेस्टोरेंट संचालकों में कोई खास रुचि नहीं दिख रही है. हम बात कर रहे हैं, बिहार के फेमस व्यंजन लिट्टी-चोखा की. 50 से भी अधिक रेस्टोरेंट, किसी के मेन्यू में नहीं है लिट्टी-चोखा छपरा शहर में 50 से भी अधिक रेस्टोरेंट खुल गये हैं. सबके मेन्यू में जायकों की अलग-अलग लिस्ट है. लेकिन स्थानीय लोगों समेत बाहर से आये लोगों को यहां के रेस्टोरेंट में लिट्टी-चोखा खाने को नहीं मिलता. कई बार लोग परिवार के साथ रेस्टोरेंट में जाते हैं. यहां स्टाटर व मेन कोर्स में कई नये व्यंजन मेन्यू में दिख जाते हैं. लेकिन लिट्टी-चोखा के नहीं होने से लोगों को निराशा होती है. हालांकि शादी-ब्याह व अन्य आयोजनों में कई बार इसे बड़े चाव से परोसा जाता है. शादी समारोह में बाहर से आये लोग लिट्टी-चोखा खाकर इसकी रेसिपी साथ ले जाते हैं. चौक-चौराहों तक सीमित है लिट्टी-चोखा लिट्टी-चोखा की बेहतर ब्रांडिंग नहीं होने से अपने शहर में ही यह विशेष व्यंजन गुमनाम होते जा रहा है. सुबह व शाम के समय रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड व शहर के कुछ प्रमुख चौक-चौराहों के पास फुटपाथ पर लिट्टी-चोखा की दुकान लगती है. स्थानीय लोग चाव से इसे खाते भी हैं. कुछ ढाबा या नाश्ते की दुकानों में इसे पारंपरिक पद्धति से बनाकर बेचा भी जाता है. हालांकि ज्यादातर लोग फुटपाथ के दुकानों पर ही लिट्टी-चोखा का स्वाद लेते हैं. चाउमीन, बर्गर, पिज्जा जैसे व्यंजनों की ब्रांडिंग कर इसके छोटे-बड़े शॉप खुल रहे हैं. लेकिन लिट्टी-चोखा परोसने को लेकर यहां के रेस्टोरेंट संचालक कोई नया प्रयोग नहीं करना चाहते हैं. बिरयानी और हांडी मटन का बढ़ा कारोबार इस समय शहर में हांडी मटन और बिरयानी की दुकानें लगातार खुल रही हैं. विगत डेढ़ वर्षों में करीब 100 दुकानें सिर्फ बिरयानी व हांडी मटन की खुली हैं. फुटपाथ पर लिट्टी-चोखा बेचने वाले कई दुकानदारों ने भी बिरयानी की दुकान खोल ली है. हालांकि बैंकिंग व अन्य कंपनी सम्बंधित कार्यों के लिए कई अधिकारी व कर्मचारी छपरा के होटल में आकर ठहरते हैं. यहां के रेस्टोरेंट में लिट्टी-चोखा को सर्च करते हैं. लेकिन लिट्टी-चोखा की ऑनलाइन डिलीवरी नहीं होने से उन्हें चौक-चौराहों पर जाकर ही इसे खाना पड़ता है. कई बार फुटपाथ के दुकानों पर सहज माहौल नहीं होने के कारण बाहर से आये लोग मन मसोस कर रह जाते हैं.

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Author: Prabhat kiran himanshu

Published by: Alok Kumar

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