Saran News : प्रायाणिक एवं सारण जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के संयुक्त तत्वावधान में रामकृष्ण मिशन आश्रम में हिंदी दिवस समारोह का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. एमके शरण ने की. समारोह का उद्घाटन वीसी प्रो. परमेंद्र कुमार बाजपेयी, रामकृष्ण मिशन के सचिव अतिदेवानंद जी महाराज, एसडीएम नितेश कुमार, एसबीआई की एजीएम ज्योति मिश्रा, डॉ. लालबाबू यादव, डॉ. बीएनपी सिंह, ब्रजेंद्र कुमार सिन्हा और बबन सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया.
हिंदी पूरे देश की भाषा और अभिमान है
सचिव ब्रजेंद्र कुमार सिन्हा ने कहा कि हिंदी किसी क्षेत्रीय भाषा की प्रतिद्वंद्वी नहीं है, बल्कि पूरे हिंदुस्तान की भाषा और अभिमान है. उन्होंने प्रायाणिक की 27 वर्षों की साहित्यिक यात्रा की जानकारी देते हुए सारण की साहित्यिक संस्थाओं को संगठित और निबंधित कराने के लिए किये गये प्रयासों पर भी प्रकाश डाला.
विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियों को शिखर एवं शलाका सम्मान
समारोह के दौरान अतिथियों और विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली हस्तियों को शिखर एवं शलाका सम्मानों से सम्मानित किया गया. प्रो. परमेंद्र कुमार बाजपेयी को महामहोपाध्याय पं. रामावतार शास्त्री शिखर सम्मान, ज्योति मिश्रा को गार्गी सम्मान और नितेश कुमार को आचार्य शिवपूजन सहाय सम्मान प्रदान किया गया.
इसी क्रम में डॉ. बीएनपी सिंह को विकास पुरुष, पूर्व विधायक डॉ. सीएन गुप्ता को महर्षि सुश्रुत, छोटी कुमारी को मैत्रेय, डॉ. डीके सिन्हा को धन्वन्तरी, डॉ. एमपी सिंह को महर्षि चरक, डॉ. लालबाबू यादव को राहुल सांकृत्यायन, डॉ. साकेत सहाय को हिंदी साहित्य उत्प्रेरणा, डॉ. विभा भारती को साहित्य संस्कृति, सुमिता कुमारी को हिंदी विदुषी शलाका, डॉ. नेहा पांडेय को डॉ. आनंदीबाई जोशी तथा डॉ. ऐनुल बरौलवी को महादेवी वर्मा शिखर सम्मान प्रदान किया गया.
‘फिरभीका’ पत्रिका का हुआ लोकार्पण
समारोह के दौरान साहित्यिक पत्रिका ‘फिरभीका’ का लोकार्पण भी किया गया. मुख्य अतिथि ने हिंदी को भारतीय संस्कृति और जागृति की भाषा बताते हुए कहा कि हिंदी का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार हुआ है. एसडीएम नितेश कुमार ने सरकारी कार्यों में हिंदी के बढ़ते प्रयोग पर प्रकाश डाला, जबकि एसबीआई की एजीएम ज्योति मिश्रा ने बैंकिंग कार्यों में हिंदी की भूमिका की चर्चा की.
डॉ. लालबाबू यादव ने हिंदी की संवैधानिक एवं राजनीतिक स्थिति पर अपने विचार रखे. शारंगधर सिंह, डॉ. अमरनाथ प्रसाद, डॉ. हरेन्द्र सिंह समेत अन्य वक्ताओं ने भी हिंदी की उपयोगिता और वर्तमान स्थिति पर विचार व्यक्त किये.
125 प्रतियोगिता विजेताओं को मिली साहित्यिक पुस्तकें
विभिन्न प्रतियोगिताओं में सफल रहे 125 विजेताओं को एसबीआई के सौजन्य से विवेकानंद साहित्य की पुस्तकें, कलम और डॉ. चित्रलेखा पुरस्कार प्रदान किये गये. इस अवसर पर बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी, शिक्षक, विद्यार्थी और गणमान्य लोग मौजूद रहे.
कार्यक्रम में कामेश्वर प्रसाद सिंह, डॉ. कामेश्वर प्रसाद सिंह, ई. जगनारायण गिरी, आदर्श कौशिक, चंदन कुमार, कमल किशोर सिंह, प्रो. श्याम शरण, आर. श्रीवास्तव सहित अन्य उपस्थित थे. संचालन सुरेश कुमार चौबे ने किया.
