Chapra Ayushman Arogya facilities : छपरा सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों को अब सिर्फ दवा और डॉक्टर की सुविधा ही नहीं, बल्कि बेहतर माहौल भी देने की तैयारी है. अस्पताल भवनों की मरम्मत और रंग-रोगन के साथ पेयजल, बैठने की जगह, पंखे और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं को भी दुरुस्त किया जाएगा. जिला अस्पताल से लेकर गांवों में संचालित आयुष्मान आरोग्य मंदिर तक इस अभियान के दायरे में होंगे.
स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है. स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव और सिविल सर्जन को दिशा-निर्देश जारी कर जरूरत के अनुसार काम कराने को कहा है. सभी स्वीकृत कार्यों को 31 अक्टूबर 2026 तक पूरा करना होगा.
जरूरत के हिसाब से तय होंगे काम
किसी भी स्वास्थ्य संस्थान में काम शुरू करने से पहले वहां की वास्तविक जरूरत का आकलन किया जाएगा. जिला अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल, रेफरल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में रोगी कल्याण समिति की कार्यकारी समिति उपलब्ध राशि और जरूरत के आधार पर प्राथमिकता सूची तैयार करेगी.
इस सूची को रोगी कल्याण समिति के शासी निकाय से मंजूरी लेनी होगी. वहीं अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर-आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में जन आरोग्य समिति से प्राथमिकता सूची का अनुमोदन कराया जाएगा.
मरीजों की सुविधाओं पर रहेगा फोकस
अभियान को केवल अस्पतालों की दीवारों के रंग-रोगन तक सीमित नहीं रखा जाएगा. मरीजों और उनके परिजनों की रोजमर्रा की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए शुद्ध पेयजल, बैठने के लिए पर्याप्त कुर्सियां, पंखे और महिला-पुरुष के लिए अलग-अलग शौचालय की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाएगी.
अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देने के लिए 32 इंच के टीवी भी लगाए जाएंगे. इन पर स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं और जागरूकता से जुड़े वीडियो दिखाए जाएंगे.
तैयार भवनों में जल्द शुरू होगी सेवा
जिन सरकारी स्वास्थ्य भवनों का निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन वहां अभी तक स्वास्थ्य सेवाएं शुरू नहीं हुई हैं, उन्हें भी प्राथमिकता दी जाएगी. हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर-आयुष्मान आरोग्य मंदिर, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के तैयार भवनों में जरूरी व्यवस्था कर जल्द सेवा शुरू कराने का निर्देश दिया गया है. इसका उद्देश्य तैयार सरकारी भवनों का उपयोग शुरू कर लोगों को उनके घर के नजदीक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है.
किराये के भवनों से सरकारी भवनों में होंगे संस्थान
जो स्वास्थ्य संस्थान फिलहाल निजी भवन या किराये के मकान में संचालित हो रहे हैं, उन्हें संभव होने पर सरकारी भवनों में स्थानांतरित किया जाएगा. इससे सरकारी स्वास्थ्य भवनों का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा और संस्थानों के संचालन में स्थायित्व आने की उम्मीद है.
अस्पताल परिसर से हटेगा कबाड़
अस्पताल परिसर में लंबे समय से पड़े अनुपयोगी वाहन, खराब उपकरण और अन्य रद्दी सामग्री भी हटाई जाएगी. ऐसे सामान का निस्तारण स्वास्थ्य विभाग के पूर्व निर्देशों के अनुसार एमएसटीसी के माध्यम से कराया जाएगा.
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इससे अस्पताल परिसर में घिरी अनावश्यक जगह खाली होगी और परिसर को अधिक व्यवस्थित किया जा सकेगा.
चहारदीवारी और सौंदर्यीकरण के लिए अलग योजना
जिन स्वास्थ्य संस्थानों में चहारदीवारी, अतिरिक्त शौचालय, मिट्टी भराई, सौंदर्यीकरण या वृक्षारोपण की जरूरत है, उनके लिए अलग सूची तैयार की जाएगी. इन कार्यों को विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जी राम जी के माध्यम से कराने की दिशा में कार्रवाई होगी.
स्वास्थ्य संस्थानवार और प्रखंडवार सूची तैयार कर संबंधित कार्यक्रम पदाधिकारी और प्रखंड विकास पदाधिकारी को भेजी जाएगी. सिविल सर्जन को जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के ऐसे जरूरी कार्यों की समेकित सूची तैयार कर जिला पदाधिकारी-सह-अध्यक्ष, जिला स्वास्थ्य समिति को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है.
राज्य स्तर से होगी निगरानी
अभियान की निगरानी के लिए राज्य स्वास्थ्य समिति की ओर से संयुक्त सचिव-सह-निदेशक (वित्त) बृन्दा लाल और अपर निदेशक (वित्त) नंद किशोर राज को राज्य स्तरीय नोडल पदाधिकारी बनाया गया है. दोनों अधिकारी उपलब्ध राशि, कराए जा रहे कार्यों और उनके समय पर पूरा होने की निगरानी करेंगे.
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अभियान की प्रगति की नियमित जानकारी राज्य स्तर पर उपलब्ध कराने को भी कहा गया है. इसके अलावा कराए गए कार्यों पर आधारित लघु फिल्म तैयार कर काम का दस्तावेजीकरण करने का निर्देश दिया गया है.
मरीजों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद
सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने कहा कि इस पहल में रोगी कल्याण समिति और जन आरोग्य समिति की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना गया है. स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य संस्थानों की वास्तविक जरूरत पहचानकर राशि का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे मरीजों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है.
उन्होंने कहा कि साफ-सफाई, पेयजल, बैठने की व्यवस्था और शौचालय जैसी सुविधाएं मरीजों के अनुभव को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण हैं. विभाग का जोर इन्हीं जरूरी सुविधाओं को व्यवस्थित करने पर है.
मरीजों की जरूरत होगी पूरी
डीपीएम अरविन्द कुमार ने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को रंग-रोगन और मरम्मत के साथ मरीजों की जरूरत वाली सुविधाओं से लैस करना स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने की व्यापक योजना का हिस्सा है. जिला अस्पताल से लेकर गांव के आयुष्मान आरोग्य मंदिर तक सुविधाएं बेहतर होने से लोगों को नजदीक ही अधिक व्यवस्थित स्वास्थ्य सेवाएं मिलने की उम्मीद है.
