Saran Flood Update : सारण प्रमंडल में सरयू-सिसवन को छोड़कर विभिन्न नदियों के जलस्तर में गिरावट के साथ बाढ़ प्रभावित गांवों और घरों से पानी निकलने लगा है. पानी घटने के साथ जहां ग्रामीण अपने घरों और सामान की स्थिति देखने पहुंच रहे हैं, वहीं अब जमे हुए पानी, मरे हुए कीड़े-मकोड़ों, सड़ रही फसल और पशुओं के शवों से उठ रही दुर्गंध ने नई परेशानी खड़ी कर दी है. कई जगहों पर कीचड़ और गड्ढों में जमा पानी के कारण लोगों को संक्रमण और बीमारी का डर सता रहा है. विस्थापित परिवार अभी भी सुरक्षित स्थानों पर रहने को मजबूर हैं.
पानी घटा तो सामने आयी सड़ांध और गंदगी की समस्या
सारण जिले के सात प्रखंड बाढ़ से प्रभावित हैं. नदियों का जलस्तर कम होने के साथ अधिकांश प्रभावित गांवों से पानी निकलने लगा है, लेकिन पानी के साथ लोगों की परेशानी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. कई जगहों पर गड्ढों में पानी जमा है, जहां से सड़ांध और बदबू निकल रही है. शहरी क्षेत्र के खेतों में घास-फूस और सड़ी फसलों से भी दुर्गंध फैल रही है. प्रभावित मोहल्लों और रास्तों पर कीचड़ जमा होने से आवागमन भी मुश्किल बना हुआ है.
ब्लिचिंग पाउडर और एंटी लार्वा के छिड़काव की मांग
बाढ़ प्रभावित शहरी क्षेत्रों के लोगों का कहना है कि जलजमाव वाले गड्ढों की तत्काल सफाई और पानी की निकासी जरूरी है. ग्रामीणों ने ब्लिचिंग पाउडर, चूना और एंटी लार्वा का नियमित छिड़काव कराने की मांग की है. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सफाई और छिड़काव नहीं हुआ तो मच्छरों और संक्रमण से बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है.
कई दियारा इलाकों में अब भी चारों ओर पानी
रिविलगंज, दिघवारा, दरियापुर और सोनपुर समेत दियारा क्षेत्र के कई गांवों में अब भी पानी जमा है. ऊंचे स्थानों पर बने कुछ घरों से पानी निकल चुका है, लेकिन आसपास जमा पानी और उससे उठ रही दुर्गंध लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है. बाढ़ प्रभावित परिवारों की नजर अब पानी पूरी तरह सूखने और हालात सामान्य होने पर टिकी है.
ग्रामीण खुद कर रहे घरों और आसपास की सफाई
पानी निकलने के बाद ग्रामीण खुद अपने घरों और आसपास की सफाई में जुट गये हैं, ताकि जल्द से जल्द सामान्य जीवन शुरू किया जा सके. रिविलगंज प्रखंड के जान टोला की रिंकी देवी, रेणु देवी और लकी देवी ने बताया कि घर से पानी निकलने के बाद सफाई शुरू कर दी गयी है, ताकि बच्चों के लिए खाना बनाने में परेशानी न हो. नेवाजी टोला दहियावा, रूपगंज के निचले इलाके समेत दिघवारा, सोनपुर और दरियापुर के कई क्षेत्रों में भी लोग कीचड़ साफ करने में जुटे हैं.
मरे हुए पशुओं और कीड़े-मकोड़ों से बढ़ी चिंता
ग्रामीणों के अनुसार बाढ़ के दौरान कई तरह के कीड़े-मकोड़े घरों और आसपास के इलाकों में चले गये थे. अब पानी घटने के बाद इनकी तलाश और सफाई भी जरूरी हो गयी है. कई स्थानों पर पशुओं के शव पड़े होने की बात भी सामने आ रही है, जिससे दुर्गंध के कारण लोगों का रहना मुश्किल हो गया है. ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल सफाई अभियान चलाने की मांग की है.
सिसवन में बढ़ा जलस्तर, बाकी जगहों पर लगातार गिरावट
बाढ़ नियंत्रण विभाग की 9 सितंबर की सुबह सात बजे की रिपोर्ट के अनुसार सिसवन में सरयू-घाघरा का जलस्तर 57.23 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 57.15 मीटर से ऊपर है. यहां तीन सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है. इसके अलावा अन्य प्रमुख नदियों के जलस्तर में कमी दर्ज की गयी है.
गंगा समेत गंडक और घाघरा में दर्ज हुई कमी
गंगा के गांधी घाट पर जलस्तर 50.10 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 50.40 मीटर है. यहां 17 सेंटीमीटर की कमी हुई. गंडक के हाजीपुर में जलस्तर 50.18 मीटर रहा, जहां 15 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गयी. गंडक के रेवा में जलस्तर 53.79 मीटर रहा और 11 सेंटीमीटर की कमी हुई. घाघरा के छपरा में जलस्तर 52.76 मीटर दर्ज किया गया, जिसमें 24 सेंटीमीटर की कमी आयी.
अधिकारी बोले- स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही
बाढ़ प्रमंडल, सारण के कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार प्रभाकर ने बताया कि केवल सिसवन घाघरा के जलस्तर में तीन सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है, जबकि बाकी सभी स्थानों पर जलस्तर में तेजी से कमी आ रही है. उन्होंने कहा कि सभी टूटे हुए बांधों को 48 घंटे के अंदर दुरुस्त कर लिया गया है और अब सभी जगह स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने लगी है.
