10 साल पहले 3 करोड़ की लागत से बने पुल, लेकिन पहुंचने का रास्ता नहीं, आज भी नाव और जर्जर रास्तों का सहारा

समस्तीपुर में 10 साल से पुल अधूरे पड़े हैं. करोड़ों की लागत के बावजूद एप्रोच रोड नहीं बनी, जिससे ग्रामीण नावों और जर्जर रास्तों पर निर्भर हैं. जानिए इस समस्या की जड़.

समस्तीपुर: मोरवा प्रखंड में नून नदी पर बने चकपहार, राजवाड़ा और गुनाई बसही पुल निर्माण के करीब एक दशक बाद भी आम लोगों के लिए पूरी तरह उपयोगी नहीं हो सके हैं. करोड़ों रुपये की लागत से पुलों की मुख्य संरचना तैयार होने के बावजूद एप्रोच रोड का निर्माण नहीं होने से ग्रामीणों को आज भी नदी पार करने के लिए पुराने और जर्जर रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है. कई जगहों पर आवागमन के लिए नाव का भी सहारा लेना पड़ता है.

328.28 लाख की लागत से बनकर तैयार है पुल

प्रशासनिक स्तर पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तीनों पुलों की मुख्य संरचना का निर्माण करीब 328.28 लाख रुपये की लागत से लगभग दस साल पहले पूरा हो चुका है. लेकिन पुल तक पहुंचने के लिए जरूरी संपर्क सड़क का निर्माण भूमि अधिग्रहण की पेचीदगियों के कारण अब तक नहीं हो सका है.

बताया जाता है कि पुल के दोनों ओर एप्रोच रोड के लिए आवश्यक भूमि को लेकर जमीन मालिकों के साथ मुआवजा और सहमति का मामला लंबे समय से लंबित है. भूमि उपलब्ध नहीं होने के कारण संबंधित विभाग संपर्क पथ का निर्माण शुरू नहीं कर पा रहा है.

अधूरे पुल पर मवेशी बांध रहे ग्रामीण

पुल का निर्माण पूरा होने के बाद भी इसके उपयोग में नहीं आने से ग्रामीणों में निराशा है. अधूरे पुल पर लोग मवेशी बांधकर अस्थायी बसेरा तक बना चुके हैं.

स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल बनने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि इलाके की आवागमन संबंधी बड़ी समस्या दूर हो जायेगी. लेकिन वर्षों गुजर जाने के बाद भी एप्रोच रोड नहीं बन सकी. इससे पुल बनने के बावजूद ग्रामीणों को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है.

विधानसभा से लेकर लोकसभा चुनाव तक उठा मुद्दा

बताया जाता है कि पूर्व विधायक विद्यासागर सिंह के कार्यकाल में इन तीनों पुलों का निर्माण कार्य पूरा हुआ था. एप्रोच पथ के निर्माण का मुद्दा तत्कालीन विधायक रणविजय साहू की ओर से विधानसभा में भी उठाया गया था.

स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष भी कई बार उठाया जा चुका है. लोकसभा चुनाव के दौरान भी एप्रोच रोड का मुद्दा जोर-शोर से उठा था. स्थानीय सांसद की ओर से भी इसे लेकर आश्वासन दिया गया था, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार अब तक स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं हुआ है.

डीएम से कार्यपालक अभियंता तक कर चुके हैं निरीक्षण

जिलाधिकारी से लेकर कार्यपालक अभियंता तक के अधिकारी स्थल का निरीक्षण कर चुके हैं. प्रशासन की ओर से समय-समय पर संपर्क सड़क के लिए राशि उपलब्ध कराने और निर्माण शुरू कराने का आश्वासन दिया जाता रहा है.

हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से मिल रहे आश्वासनों के बावजूद धरातल पर स्थिति नहीं बदली है.

सहयोग शिविर में भी ग्रामीणों ने उठाया मुद्दा

हाल ही में चकपहार पंचायत में आयोजित सहयोग शिविर में भी ग्रामीणों ने पुल और एप्रोच रोड का मुद्दा प्रमुखता से उठाया. ग्रामीणों ने अधिकारियों के समक्ष नाराजगी जताते हुए कहा कि जब पुल की मुख्य संरचना वर्षों पहले बनकर तैयार हो चुकी है, तो संपर्क सड़क के अभाव में इसका इस्तेमाल क्यों नहीं हो पा रहा है.

ग्रामीणों की मांग है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जल्द पूरी कर एप्रोच रोड का निर्माण कराया जाए, ताकि नून नदी पर बने पुल वास्तव में लोगों के आवागमन का माध्यम बन सकें.

पंचायत की मुखिया निक्की गिरी, प्रतिनिधि पिंटू गिरी, चमन कुमार, पन्नालाल यादव, राकेश कुमार आदि ने कहा कि पुल चालू हो जाता तो वैशाली और समस्तीपुर जिले के बीच सीधा संपर्क स्थापित होता. इससे पंचायत समेत पूरे क्षेत्र के विकास को भी गति मिलती.

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By Manoj kumar verma

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